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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - किव करि आखा किव सालाही किउ वरनी किव जाणा।।नानक आखणि सभु को आखै इक दू కెర్త్ RI3IUITIl मै तेरा अर्थः गुरु नानक देवजी कहते हैं कि वह अकाल पुरख ईश्वर इतना अनंत और असीम है कि मुझमें यह सामर्थ्य ही नहीं है कि मैं यह बता सकूं कि भिखारी है। मैं किस मुंह से उसकी प्रशंसा करूँ, कैसे उसकी महिमा वह कैसा ' का वर्णन करूँ और अपनी छोटी सी बुद्धि से उसे कैसे समझूँ? वह जिओ हमारी सोच और शब्दों से परे है।कहने को तो हर कोई अपनी समझ अनुसार उसके बारे में कहता है, हर कोई खुद को दूसरे से अधिक 46TST समझकर ईश्वर को परिभाषित करने की सियाणा (बुद्धिमान या चतुर) में हर व्यक्ति खुद को दूसरे से बड़ा ज्ञानी वाले कोशिश करता है। इस संसार ' परमेश्वर के बारे में तरहन्तरह की बातें करता है और उसे मानकरउस सीमाओं में बांधने की कोशिश करता है। लेकिन सच यह है कि कोई बाबा कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो जाए, वह उस अनंत परमात्मा का पूरा अंत नहीं पा सकता। जब हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि हम उस जी परमात्मा के सामने बहुत छोटे हैं, तभी ' भीतर का अहंकार खत्म हमारे ' होता है। किव करि आखा किव सालाही किउ वरनी किव जाणा।।नानक आखणि सभु को आखै इक दू కెర్త్ RI3IUITIl मै तेरा अर्थः गुरु नानक देवजी कहते हैं कि वह अकाल पुरख ईश्वर इतना अनंत और असीम है कि मुझमें यह सामर्थ्य ही नहीं है कि मैं यह बता सकूं कि भिखारी है। मैं किस मुंह से उसकी प्रशंसा करूँ, कैसे उसकी महिमा वह कैसा ' का वर्णन करूँ और अपनी छोटी सी बुद्धि से उसे कैसे समझूँ? वह जिओ हमारी सोच और शब्दों से परे है।कहने को तो हर कोई अपनी समझ अनुसार उसके बारे में कहता है, हर कोई खुद को दूसरे से अधिक 46TST समझकर ईश्वर को परिभाषित करने की सियाणा (बुद्धिमान या चतुर) में हर व्यक्ति खुद को दूसरे से बड़ा ज्ञानी वाले कोशिश करता है। इस संसार ' परमेश्वर के बारे में तरहन्तरह की बातें करता है और उसे मानकरउस सीमाओं में बांधने की कोशिश करता है। लेकिन सच यह है कि कोई बाबा कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो जाए, वह उस अनंत परमात्मा का पूरा अंत नहीं पा सकता। जब हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि हम उस जी परमात्मा के सामने बहुत छोटे हैं, तभी ' भीतर का अहंकार खत्म हमारे ' होता है। - ShareChat