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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - गुरु देवा गुरु अलख अभेवा त्रिभवण सोझी गुरकी सेवा।l आपे दाति करी गुरि दातै पाइआ अलख अभेवा ম নয अर्थः गुरु ही देव स्वरूप हैं और गुरु ही उस अलख (अदृश्य) और . अभेव (रहस्यमयी ) परमात्मा का रूप हैं। गुरु की निश्छल सेवा करने . भिखारी से मनुष्य को तीनों लोकों पूरे ब्रह्मांड और आत्मिक सत्य की समझ और ज्ञान प्राप्त हो जाता है। अर्थात, गुरु की शिक्षाओं पर चलने से जिओ आ जाता है।जब दाता गुरु स्वयं जीवन का सर्वोच्च सत्य ' समझ में 46TST कृपा करके नाम सिमरन या ज्ञान की दात देते हैं, तब उस अदृश्य और अभेद्य परमात्मा की प्राप्ति हो जाती है। यह सब गुरु की अपनी वाले दया और बख्शिश के कारण ही संभव हो पाता है। गुरु और परमात्मा में कोई भेद नहीं है। ईश्वर को पाने का मार्ग गुरु की सेवा @IqT उनकी शिक्षाओं को जीवन में ढालना ) से होकर गुजरता है। जब गुरु তী प्रसन्न होकर ज्ञान की बख्शिश करते हैं, तो मन के सारे भ्रम दूर हो जाते हैं और उस निराकार प्रभु का अनुभव होने लगता है। गुरु देवा गुरु अलख अभेवा त्रिभवण सोझी गुरकी सेवा।l आपे दाति करी गुरि दातै पाइआ अलख अभेवा ম নয अर्थः गुरु ही देव स्वरूप हैं और गुरु ही उस अलख (अदृश्य) और . अभेव (रहस्यमयी ) परमात्मा का रूप हैं। गुरु की निश्छल सेवा करने . भिखारी से मनुष्य को तीनों लोकों पूरे ब्रह्मांड और आत्मिक सत्य की समझ और ज्ञान प्राप्त हो जाता है। अर्थात, गुरु की शिक्षाओं पर चलने से जिओ आ जाता है।जब दाता गुरु स्वयं जीवन का सर्वोच्च सत्य ' समझ में 46TST कृपा करके नाम सिमरन या ज्ञान की दात देते हैं, तब उस अदृश्य और अभेद्य परमात्मा की प्राप्ति हो जाती है। यह सब गुरु की अपनी वाले दया और बख्शिश के कारण ही संभव हो पाता है। गुरु और परमात्मा में कोई भेद नहीं है। ईश्वर को पाने का मार्ग गुरु की सेवा @IqT उनकी शिक्षाओं को जीवन में ढालना ) से होकर गुजरता है। जब गुरु তী प्रसन्न होकर ज्ञान की बख्शिश करते हैं, तो मन के सारे भ्रम दूर हो जाते हैं और उस निराकार प्रभु का अनुभव होने लगता है। - ShareChat