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सबद संत कबीर #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - "सबद" जैहौ कौनी ओर 347< मुसाफ़िर जैहौ कौनी ओर काया सहर क़हर है न्यारा दुई फाटक घनघोर काम क्रोध जहं मन है राजा बसत पचीसो चोर संसय नदी बहै जल धारा बिसय लहर उठे ज़ोर अब का ग़ाफ़िल सोवै बौरा इहाँ नहिं कोई तोर उतर दिसा इक पुरूष बिदेही उन पय करो Aek दाया लागे तब लै जैहैँ तब पावो निज ठौर पाछल पैँड़ा समझो भाई वहे रहो नाम कि ओर कहै ' कबीर सुनो हो साधो नाहीँ तौ पैहौ झकझोर (संत कबीर) Want . Motivational Videos App "सबद" जैहौ कौनी ओर 347< मुसाफ़िर जैहौ कौनी ओर काया सहर क़हर है न्यारा दुई फाटक घनघोर काम क्रोध जहं मन है राजा बसत पचीसो चोर संसय नदी बहै जल धारा बिसय लहर उठे ज़ोर अब का ग़ाफ़िल सोवै बौरा इहाँ नहिं कोई तोर उतर दिसा इक पुरूष बिदेही उन पय करो Aek दाया लागे तब लै जैहैँ तब पावो निज ठौर पाछल पैँड़ा समझो भाई वहे रहो नाम कि ओर कहै ' कबीर सुनो हो साधो नाहीँ तौ पैहौ झकझोर (संत कबीर) Want . Motivational Videos App - ShareChat