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, #गर्भावस्था
कबीर, वो दिन याद कर, पग ऊपर तले शीश।
मृत मंडल में आय कर, भूल गया जगदीश।।
कबीर साहिब जी कहते हैं कि जब इंसान मा के गर्भ मे होता है तब वहा पर जठरअग्नि की तपत, बदबू, शीलन जलन, आदि समस्या से ग्रस्त प्राणी परमात्मा से भजन करता है कि मुझे एक बार मा के गर्भ से बाहर निकल दो फिर मै आपका भजन करूगा। बाहर आते ही जीव पांच महाविकार मे उलझ जाता है। परमात्मा को याद नही रखता।
थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा,रोव था भजन करूँगा हर तेरा!
ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा..............................!
नाभ कमल में नीर जमया तेरा, दिन्या महल बनाय............!
नीचै जठरा अग्नि जले थी,तेरे लगी न ताती बाय..............!
निचे शीश चरण ऊपर कू, वो दिन याद कराय.................!
थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा, रोव था भजन करूँगा हर तेरा!
ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................!
नैन नाक मुख दुवारा देहि, यो नक्षक साज बनाय..............!
दाँत नही जबदूध दिया था,अमीमहारस खाया भरया उदर तेरा!
थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा, रोव था भजन करूँगा हर तेरा!
ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................!
थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा,रोव था भजन करूँगा हर तेरा!
ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................!
दाई आई रे घूंटी प्याई, माता गोद खिलाय......................!
बाहर आया भ्रम भुलाया, तेरे बाजे तुर शहनाय................!
तुंही तुंही तो छोड़ दिया, इब चल्या अधम किस राह...........!
जो दिन आज सो काल नही रे, आगे फिर धर्मराय............!
कहा गया डर तेरा, ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा टेक..!
थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा, रोव था भजन करूँगा हर तेरा!
ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................!
काले काग गए घर अपने, ये बैठे श्वेत बुगाय...................!
जाड़ दाँत तेरे उखड गई या, जीभ गयी ततुलाय...............!
जम किंकर तेरे सिराणे रे बैठाया, यो खर्च कदे का खाय.....!
रसना बीच जो मेख मार दे, फिर सेनो दाम बताय.............!
ऎसे सुम भतेरे जगत में, धरया ढक्या रह जाय.................!
कहा गया जर तेरा,ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा........!
थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा, रोव था भजन करूँगा हर तेरा!
ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................!
कुल के लोग जंगल में लेज्या कै, तू दिन्या ठोक जलाय......!
फिर पीछे तो पशुआ कीजे, दीजे बैल बनाय...................!
चार पहर जंगल में डोले, तेरा तो न उदर भरै...................!
सिर पर सिंग दिए मन बहुरे, एक दुम ते मछर मत उड़ाय.....!
काँधे जुआ रे जोते कुआँ, कोन्दो का भुस खाय................!
थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा,रोव था भजन करूँगा हर तेरा.!
ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................!
जब थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा..............................!
रोव था भजन करूँगा हर तेरा....................................!
फिर पीछे तू खर कीजे गा, कितै कुरडी चरने जाय.............!
टूटी कमर पजावै रे चढ़ै, तेरा काग माँस गीलावै................!
कहा गया घर वासा तेरा, आटि थी भजन करूंगा हर तेरा....!
थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा,रोव था भजन करूँगा हर तेरा!
ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................!
सुखदेव न चौरासी रे भुगती, कहा रंक कहा राय..............!
ऐसी माया राम बली की, ये नारद मुनि भरमाय...............!
ध्रुव प्रहलाद कबीर नाम दे, रहे निशान घुराय..................!
दास गरीब चरण का चेरा, शब्द् शब्द समाय,
अमरापुर होया डेरा.................................................!
थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा,रोव था भजन करूँगा हर तेरा.!
ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................!
भाई वो दिन करले याद गर्भ में था डेरा...........................!
रोवै था के भजन करूँगा हर तेरा..................................!
जब मां के पेट मे थे, वहां भी हमारी देखभाल उसी कबीर साहब ने की। कोई मां बाप वहां भोजन नही कराने आता था। वहां तो बडी बडी कसमें खा लेते थे भगवान मुझे इस कैद से बाहर करो मै आपकी भक्ति करूंगा। राम जी कृष्ण जी भी इसी गर्भ से आये है स्वयंभू तो सिर्फ एक कबीर साहब है जो सशरीर आते है और सशरीर जाते है। जिसका वेद भी गुणगान करते है और कुरान, गुरू ग्रन्थ साहेब भी, हम ने पहचाना अब आपको बता रहे है।
कहीं कल मर के धर्मराज को यह ना कहो हमे तो कबीर साहब का ज्ञान बताने वाला कोई मिला नही। वहा सब हिसाब किताब देना पडेगा।
अपराधों को आधार बनाकर, कर्म समझ कर करते है
पापी को ऊपर ले जाकर, यमराज पकौड़े तलते है।।
जन्म से लेकर मृत्यु तक, पलपल का न्याय भी करते है
सुना है ऊपर ले जाकर, यमराज पकौड़े तलते हैं।।
देखा है मैंने माँ को भी,आलू में बेसन का लपटाना,
तेल गरम करके बर्तन में, लाल पकौड़े तल जाना।।
छीटा जरा भी पड़े तेल का, हाय फफोले पड़ते है,
सुना है ऊपर ले जाकर, यमराज पकौड़े तलते है।।
लिया हाथ में कलम औ पत्री, अपना एक हिसाब किया,
खण्ड बाँट कर पापपुण्य का,कर्मो पे गहन विचार किया।
पुण्य तो याद रहे न इक भी, पापों को मैंने स्वीकार किया,
स्मरण शक्ति पर जोर डालकर, लेखाजोखा तैयार किया।।
कटु वचन कहे किस से, कितनो से मैंने दुर्व्यवहार किया,
बाल्यकाल की माया में, छोटों पर है अनुचित वार किया।
भय ग्रसित ह्रदय अब डरता है, प्रतिकार नही ये करता है,
चूक से चीटी कुचली न जाये, ये कदम फूंक कर रखता है
सतगुरू जी दिया नाममन्त्र, घन्टो जुबां पर लाता था।
जो पाप हुए वो माफ़ करो, हर वाक्य यही दोहराता हूँ।।
पल दो पल बीते कुछ पल में, निद्रा ने मुझको घेर लिया,
शिथिल पड़े ललाट पटल पर,स्वप्नों ने फिर आखेट किया
यमराज थे कोई और थे, उज्जवल सी थी उनकी काया।
मैं सिर पर पाँव राखा, बोला, भागो! दंडाधिकारी आया।।
वो रोकें और मुझे बोले, क्यों भय तेरे मुख पे है छाया।
दण्ड से क्यों तू डरती है, अभी तेरा वक्त नही आया।।
लेखाजोखा कर्ता में सबका, मैं ही पुर्ण ब्रह्म सुन प्यारा हूँ
दण्ड कभी देता नही मैं, मैं तो केवल तारणहारा हूँ।।
सीर नीचे किये करजोड़ खड़ा,सतगुरू को प्रणाम किया।
नीचसी युक्ति सूझी मुझको,मेरी मूड़ अक्ल ने काम किया।
हे गुरू! एक है बिनती मेरी, काट दीजिये मेरे सारे पाप।
ऐसा लेखा लिखिए मेरा, पुण्य बढ़ जाएँ अपने आप।।
जोखिम इसमें है बहुतेरे, पर हो सके तो थोड़ी दया दे दो।
मन भाप मेरा सतगुरू कहे, ये अक्ल कहा से लातो हो।
उलटी सीधी तिकड़म करता, फिर दण्ड से क्यों घबराते हो।
धन दौलत का मुझे मोह नही,मैं न्याय सदैव ही करवाता हूँ।
सिर्फ तेरे पाप और पुण्य नही, ब्रम्हांड का करता धर्ता हूँ।
कहा सुना सब बिसरा दे, तेरी पाप डिलीट में करता हूँ।।
फिर ऐसा सोची तो पाप लगेगा,यह बात रिपीट मैं करता हूँ
चल जाता हूँ है काम मुझे, एक पल का नही विश्राम मुझे।।
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