Shivani
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गांव के किनारे एक शांत नहर बहती थी। नहर के दूसरी ओर किसान धान की रोपाई में लगे रहते थे। कोई खेत में पानी छोड़ रहा था, कोई पौधे लगा रहा था। चारों तरफ हरियाली और मेहनत की खुशबू फैली रहती थी।
उसी नहर के पास एक पुराना सूखा पेड़ खड़ा था। उसकी टहनियाँ ऐसी दिखाई देती थीं मानो आकाश की ओर उठा हुआ त्रिशूल हों। गांव के बुज़ुर्ग कहते थे कि यह कोई साधारण पेड़ नहीं, बल्कि एक पवित्र स्थान है।
एक दिन लोगों ने देखा कि उस पेड़ के नीचे स्वयं श्री हनुमान जी विश्राम कर रहे हैं। उनका मुख वानर जैसा तेजस्वी था, सिर पर स्वर्ण मुकुट शोभा दे रहा था। उनके पूरे शरीर पर लाल सिंदूर चमक रहा था। लंबी पूंछ उनके पास लहराती हुई दिखाई दे रही थी और उनकी दिव्य गदा एक ओर रखी थी।
हनुमान जी के चरणों के पास सफेद गुलाबों के फूल बिखरे हुए थे। चारों ओर सिंदूर और कुमकुम की लाल आभा फैली हुई थी। ऐसा लग रहा था मानो देवता स्वयं आकर उनकी पूजा कर गए हों।
धीरे-धीरे यह समाचार पूरे क्षेत्र में फैल गया। किसान अपने काम से पहले वहां आकर प्रणाम करने लगे। जो भी भक्त सच्चे मन से हनुमान जी के दर्शन करता, उसके मन का भय दूर हो जाता और उसके कार्य सफल होने लगते।
कहते हैं कि आज भी उस पवित्र स्थान पर सुबह की पहली किरण पड़ते ही दिव्य सुगंध फैल जाती है। गांव वाले मानते हैं कि हनुमान जी वहीं विश्राम करते हुए अपने भक्तों, खेतों और पूरे गांव की रक्षा कर रहे हैं। इसलिए उस स्थान को लोग प्रेम से "विश्रामधाम पंचमुखी हनुमान स्थल" कहकर पुकारते हैं।
जय श्री राम 🚩 जय बजरंगबली 🚩 #Jay 🙏Shri🐚 Ram
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