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#📖 कविता और कोट्स✒️ #📚कविता-कहानी संग्रह #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य
📖 कविता और कोट्स✒️ - वक़्त की किताब ' खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं, हवा चले न चले , दिन पलटते रहते हैं। लफ़्ज़ कुछ धुंधले , कुछ साफ़ नज़र आते हैं, यादों के निशाँ दिल में बसते रहते हैं। कभी मुस्कान बनके चेहरे पे खिल जाते हैं, कभी आँसू बनकर चुपचाप बहते रहते हैं। वक़्त की स्याही से लिखी हर एक कहानी , हम चाहें भी तो कहाँ बदलते रहते हैं। रास्ते वही हैं, मंज़िलें नई लगती हैं, कदम अपने ही खुद को टटोलते रहते हैं। ज़िंदगी एक किताब है अधूरी सी, हम हर दिन उसमें कुछ जोड़ते रहते हैं। Youri uote.in Gupta Ji वक़्त की किताब ' खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं, हवा चले न चले , दिन पलटते रहते हैं। लफ़्ज़ कुछ धुंधले , कुछ साफ़ नज़र आते हैं, यादों के निशाँ दिल में बसते रहते हैं। कभी मुस्कान बनके चेहरे पे खिल जाते हैं, कभी आँसू बनकर चुपचाप बहते रहते हैं। वक़्त की स्याही से लिखी हर एक कहानी , हम चाहें भी तो कहाँ बदलते रहते हैं। रास्ते वही हैं, मंज़िलें नई लगती हैं, कदम अपने ही खुद को टटोलते रहते हैं। ज़िंदगी एक किताब है अधूरी सी, हम हर दिन उसमें कुछ जोड़ते रहते हैं। Youri uote.in Gupta Ji - ShareChat