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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - వ a मनहठि करम कमावणे फिरि फिरि जोनी पाइ।गुरमुखि जनमु सफलु है जिस नो मिलाइ।। आपे लए मै तेरा अर्थःजो मनुष्य अपने मन केअहंकार और जिद के अधीन के चक्र में होकर कर्म करता है, वह बारबार जन्म और মুৃন্ত্ব ' फंसा रहता है।जब भी मनुष्य "मैं" के अहंकार भिखारी आकर यह सोचते हैं कि "मैं ही सब या अपनी करने वाला हू' ह्लुँछ्ो कसकेव कर्म हडैँसको  जिद्दी वृत्तियों के पीछे भागते 3 Id की ओर नहीं बल्कि बंधनोंकी ओर ले जाता है।उसके मॅन का हठ उसको सत्य को देखने नहीं देता है। इसके विपरीत गुरमुख मनुष्य जिसका मुख गुरु की शिक्षाओं   पहाडा की ओर है का जन्म सफल हो जाता है, जिसे परमात्मा स्वयं वाले अपने अंदर लीन कर लेता है। सफलता सांसारिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि परमात्मा से मिलन में है।जब बाबा कोई अपने अहंकार को त्याग कर गुरु के बताए मार्ग पर चलता है, तो प्रभु की कृपा से उसका जीवन सार्थक हो U से मुक्त ' जाता है और वह आवागमन के चक्र हो जाता हैl వ a मनहठि करम कमावणे फिरि फिरि जोनी पाइ।गुरमुखि जनमु सफलु है जिस नो मिलाइ।। आपे लए मै तेरा अर्थःजो मनुष्य अपने मन केअहंकार और जिद के अधीन के चक्र में होकर कर्म करता है, वह बारबार जन्म और মুৃন্ত্ব ' फंसा रहता है।जब भी मनुष्य "मैं" के अहंकार भिखारी आकर यह सोचते हैं कि "मैं ही सब या अपनी करने वाला हू' ह्लुँछ्ो कसकेव कर्म हडैँसको  जिद्दी वृत्तियों के पीछे भागते 3 Id की ओर नहीं बल्कि बंधनोंकी ओर ले जाता है।उसके मॅन का हठ उसको सत्य को देखने नहीं देता है। इसके विपरीत गुरमुख मनुष्य जिसका मुख गुरु की शिक्षाओं   पहाडा की ओर है का जन्म सफल हो जाता है, जिसे परमात्मा स्वयं वाले अपने अंदर लीन कर लेता है। सफलता सांसारिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि परमात्मा से मिलन में है।जब बाबा कोई अपने अहंकार को त्याग कर गुरु के बताए मार्ग पर चलता है, तो प्रभु की कृपा से उसका जीवन सार्थक हो U से मुक्त ' जाता है और वह आवागमन के चक्र हो जाता हैl - ShareChat