बात थोड़ी कड़वी है मगर इसमे काफी हद तक सच्चाई है कि आजकल 'आवारगी' को आधुनिकता का पैमाना मान लिया गया है ! युवा पीढ़ी इसी को स्वतंत्रता मानने लगी है ! यही नहीं आदर्शवादी इंसान को देखकर कुछेक लोग गौरवान्वित महसूस कर सकते हैं ! लेकिन वह आज के कथित युवा वर्ग की
के लिए उपहास का पात्र मात्र है ! और एक कड़वा सच यह भी है कि आधुनिक दौर मे आदर्शों को मानने वाला और उन पर चलने का प्रयास करने वाला व्यक्ति अपने ही परिवार के सदस्यों को सबसे ज्यादा खटकता है !
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)

