ShareChat
click to see wallet page
search
सौर मास (सूर्य मास) वर्ष 2026 में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास/मलमास) का समापन 15 जून को सोमवती अमावस्या के दिन हो रहा है。 इस पवित्र दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है。 इसके समापन के साथ ही रुके हुए मांगलिक कार्यों (जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि) पर लगा प्रतिबंध समाप्त हो ऋतु, सौर माह के अनुसार, सूर्य की गति के अनुसार बने हुए हैं। सूर्य अश्विनी नक्षत्र से भ्रमण करते हुए फिर से उसी जगह आता है। उस कालावधि को सौर वर्ष कहा जाता है। चंद्र वर्ष एवं सौर वर्ष इनमें मेल होना चाहिए इसलिए अधिक माह का प्रयोजन है । चंद्र वर्ष 354 दिन एवं सौर वर्ष 365 दिन का होता है अर्थात इन दोनों वर्षों में 11 दिन का अंतर होता है यह अंतर भर जाए तथा चंद्र वर्ष एवं सौर वर्ष इनका मेल बैठे इसलिए लगभग 32 1/2 माह (साढे बत्तीस) के बाद एक अधिक माह मानते हैं अर्थात 27 से 35 माह के बाद एक अधिक माह आता है। अधिक मास किस माह में आता है? चैत्र से अश्विन इन 7 माह में से 1 माह अधिक मास के रूप में आता है। फाल्गुन माह भी अधिक मास के रूप में आता है। कार्तिक मार्गशीर्ष एवं पौष इन मासों को जोड़कर अधिक मास नहीं आता। इन 3 महीनों में से कोई भी एक माह क्षय हो सकता है, क्योंकि इन 3 महीनों में सूर्य की गति अधिक होने के कारण एक चंद्र मास में उसके दो संक्रमण हो सकते हैं। क्षय माह आता है तब 1 वर्ष में क्षय माह से पहले एक एवं बाद का एक ऐसे दो अधिक माह पास पास आते हैं। माघ माह अधिक मास या क्षय मास नहीं होता। प्रत्येक माह में सूर्य 1-1 राशि में संक्रमण करता है परंतु अधिक मास में सूर्य किसी भी राशि में संक्रमण नहीं करता अर्थात अधिक मास में सूर्य संक्रांति नहीं होती। इस कारण चंद्र एवं सूर्य इनकी गति में फर्क पड़ता है एवं वातावरण भी ग्रहण काल के समान परिवर्तित होता है। इस परिवर्तित होते अनिष्ट वातावरण का प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर ना हो इसलिए इस माह में व्रत एवं पुण्य दायक कृतियां करनी चाहिए ऐसा शास्त्र कारों ने कहा है। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - १५ जून २०२६ सोमवार ज्येष्ठ ऊ नमोः भगवते aigear पुरुषात्तम अधिक मास समापन Motivational Videos App Want १५ जून २०२६ सोमवार ज्येष्ठ ऊ नमोः भगवते aigear पुरुषात्तम अधिक मास समापन Motivational Videos App Want - ShareChat