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सूख शब्द की चासनी , कहाँ मधुर हो भाव । विविध विचारों में चले,स्वाद के टूटे पाँव ॥ #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #कविता #📗प्रेरक पुस्तकें📘
👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 - सूख शब्द की সামনী कहां मधुर हा भाव विविध विचारों में चले, स्वाद के टूटे पाँत्र I /4~78` 1 fsia थारोथ सशय कल्पना 74<7 आस्था तक मतमेद <7 कोण সামনা {   ( सूख शब्द की সামনী कहां मधुर हा भाव विविध विचारों में चले, स्वाद के टूटे पाँत्र I /4~78` 1 fsia थारोथ सशय कल्पना 74<7 आस्था तक मतमेद <7 कोण সামনা {   ( - ShareChat