पत्थर ने पैदा किए , फूलों के संसार ।
सजा जिसे दरबार में , बने स्वयं मीनार ।
बने स्वयं मीनार , सजाते महल आज भी।
दिखते हैं साकार , करें ज्यों लगे राज भी ॥
गाली खाते आज, नाम पर अपने अक्सर।
फूल बने हैं प्रेम , नफरतों के हैं पत्थर ॥ #📚कविता-कहानी संग्रह #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #कविता #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺