शहरों में जा खो गई , गाँवों की मुस्कान ।
करते हैं अब तो सभी, नकली सुख सन्धान ॥
नकली सुख सन्धान, ईट पत्थर में करते ।
पिज्जा ,बर्गर चिप्स , पेट में अपने भरते ॥
गाँव पुकारे आज , बावलों देखो ठहरो ।
मुझको छोड़े शुध्द , न भटको शहरों -शहरों ॥ #📚कविता-कहानी संग्रह #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #कविता #कविता