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#☝ मेरे विचार 👉ये ही सच है ऐसा ही चल रहा है 🤔 इस दुनिया में बहुत पुरूष हैं जो अभी भी स्त्री को नहीं समझ पाए 100 में 95%पुरूष को तो स्त्री के शक्ति के बारे में पता ही नहीं है कि स्त्री घर के साथ खुद के लिए वो कुछ कर सकती है लेकिन पुरुष उनका हौशला बढ़ने की बजह उनको हमेशा नीचा दिखाने लगते हैं कि वो कुछ नहीं कर सकती हैं उनमें भी 5% ऐसा पुरुष होते हैं जो स्त्री के सपोर्ट करते हैं 🤔अब आप सभी लोग ये बताये की आप लोग 95%❌में आना चाहते हैं या 5%✅में आप को अभी भी पुरुष के ही ऊपर निर्भर रहना है या खुद कि पहचान बनानी है 🤗 👉Commen me 👈👍
☝ मेरे विचार - पुरुष ने कभी महसूस नहीं किया एक कि उसे खाना बनाना नहीं आता, उसे घर संभालना नहीं आता, अपनी चीज़ों का ख़्याल रखना नहीं आता, अपनों की देखभाल करना नहीं आता। क्योंकि स्त्री ने कभी उसे यह महसूस ही नहीं होने दिया। लेकिन पुरुष ने बार-्बार महसूस कराया कि स्त्री पैसे नहीं कमा सकती, अपनी चीज़ें नहीं ख़रीद सकती , अपने फैसले नहीं कर सकती , अकेले बाहर नहीं जा सकती। बस इसी लिए स्त्री बाहर जाकर पैसे कमाना चाहती है। प्रिया सबका साहित्य पुरुष ने कभी महसूस नहीं किया एक कि उसे खाना बनाना नहीं आता, उसे घर संभालना नहीं आता, अपनी चीज़ों का ख़्याल रखना नहीं आता, अपनों की देखभाल करना नहीं आता। क्योंकि स्त्री ने कभी उसे यह महसूस ही नहीं होने दिया। लेकिन पुरुष ने बार-्बार महसूस कराया कि स्त्री पैसे नहीं कमा सकती, अपनी चीज़ें नहीं ख़रीद सकती , अपने फैसले नहीं कर सकती , अकेले बाहर नहीं जा सकती। बस इसी लिए स्त्री बाहर जाकर पैसे कमाना चाहती है। प्रिया सबका साहित्य - ShareChat