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#❤️अस्सलामु अलैकुम #Islam ki pyari baten 🤲🤲🤲🌃🌃🌃🕋🕋🕋🤲🤲🤲⭐⭐⭐
❤️अस्सलामु अलैकुम - नमाज़ कबूल होने की शर्त क्या है? हम रोज़ नमाज़ पढ़ते हैं... लेकिन क्या कभी सोचा कि हमारी नमाज़ सच में कबूल हो रही है? क्या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः " अल्लाह उस नमाज़ को कबूल नहीं करता जिसमें दिल हाज़िर न हो। " यानी सिर्फ जिस्म का खडा होना काफी नहीं, नमाज़ में दिल का जुड़ना भी जरूरी है। जब नमाज़ में दिमाग  इधर उधर भागता रहे, जल्दी जल्दी रुकू॰सज्दा हो जाए, तो नमाज़ सिर्फ एक आदत बन जाती है, इबादत नहीं। असली नमाज़ वह है जिसमें इंसान महसूस करे कि वह अपने रब के सामने खडा है और 46 उससे बात कर रहा है। इसलिए अगली नमाज़ से कोशिश करेंः धीरे पढ़़ें , समझकर पढ़़ें , और दिल को भी साथ लेकर खड़े हों। क्योंकि... कबूल वही नमाज़ होती है, जिसमें दिल भी शामिल हो। ऐ अल्लाह! हमारी नमाज़ों को कबूल फरमा और हमें दिल से नमाज़ पढ़ने की तौफ़ीक़ दे। आमीन। नमाज़ कबूल होने की शर्त क्या है? हम रोज़ नमाज़ पढ़ते हैं... लेकिन क्या कभी सोचा कि हमारी नमाज़ सच में कबूल हो रही है? क्या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः " अल्लाह उस नमाज़ को कबूल नहीं करता जिसमें दिल हाज़िर न हो। " यानी सिर्फ जिस्म का खडा होना काफी नहीं, नमाज़ में दिल का जुड़ना भी जरूरी है। जब नमाज़ में दिमाग  इधर उधर भागता रहे, जल्दी जल्दी रुकू॰सज्दा हो जाए, तो नमाज़ सिर्फ एक आदत बन जाती है, इबादत नहीं। असली नमाज़ वह है जिसमें इंसान महसूस करे कि वह अपने रब के सामने खडा है और 46 उससे बात कर रहा है। इसलिए अगली नमाज़ से कोशिश करेंः धीरे पढ़़ें , समझकर पढ़़ें , और दिल को भी साथ लेकर खड़े हों। क्योंकि... कबूल वही नमाज़ होती है, जिसमें दिल भी शामिल हो। ऐ अल्लाह! हमारी नमाज़ों को कबूल फरमा और हमें दिल से नमाज़ पढ़ने की तौफ़ीक़ दे। आमीन। - ShareChat