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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - र्तनुतिआगि कउडी र्संगि रचै। साचु छोडिझूठ संगि मचै।। अर्थः हे भाई! माया धारी मनुष्य परमात्मा के नाम और आत्मिक आनंद मीठा जैसे अनमोल रत्न को छोड़कॅर, कौड़ियों के भाव वाले तुच्छ सांसारिक विकारों और माया मोह में फंसा हुआ है। वह उस चीज़ को समेटने में जिंदगी लगा देते हैं जो अंत में हमारे साथ नहीं जानी। जो सदा रहूने वाला लगे उसे भुलाकर मनुष्य उस झूठे नाशवान संसार और सत्य परमात्मा है में पूरी तरह डूबा हुआ है, जिसका नष्ट होना निश्चित है। सुखों ' उसके झूठे ' गुरु साहिब जी हमें समझाते हैं कि हम इस নযা संसार में आकर अपने जीवन का असली शान शौकत, मकसद भूल गए हैंl हम झूठी ईर्ष्या, और लोभ जैसी कौड़ियों को बटोरने में भाणा इतने व्यस्त हैं कि जीवन के असली रत्न यानी संतोष, प्रेम, और सिमरन को खोते जा रहे हैं। जागृत करने और सही मार्ग ' ತ यह पंक्ति ' हमें | की प्रेरणा देती है। र्तनुतिआगि कउडी र्संगि रचै। साचु छोडिझूठ संगि मचै।। अर्थः हे भाई! माया धारी मनुष्य परमात्मा के नाम और आत्मिक आनंद मीठा जैसे अनमोल रत्न को छोड़कॅर, कौड़ियों के भाव वाले तुच्छ सांसारिक विकारों और माया मोह में फंसा हुआ है। वह उस चीज़ को समेटने में जिंदगी लगा देते हैं जो अंत में हमारे साथ नहीं जानी। जो सदा रहूने वाला लगे उसे भुलाकर मनुष्य उस झूठे नाशवान संसार और सत्य परमात्मा है में पूरी तरह डूबा हुआ है, जिसका नष्ट होना निश्चित है। सुखों ' उसके झूठे ' गुरु साहिब जी हमें समझाते हैं कि हम इस নযা संसार में आकर अपने जीवन का असली शान शौकत, मकसद भूल गए हैंl हम झूठी ईर्ष्या, और लोभ जैसी कौड़ियों को बटोरने में भाणा इतने व्यस्त हैं कि जीवन के असली रत्न यानी संतोष, प्रेम, और सिमरन को खोते जा रहे हैं। जागृत करने और सही मार्ग ' ತ यह पंक्ति ' हमें | की प्रेरणा देती है। - ShareChat