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#व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - नारद जयन्ती २०२६ नारद जयन्ती को देवर्षि नारद मुनि के जन्मदिवस की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जाता है। वैदिक तथा कथाओं के अनुसार, देवर्षि नारद एक सार्वभौमिक पुराणों : देवदूत तथा देवताओं के लिये समस्त प्रकार की जानकारी के प्राथमिक स्रोत हैं नारद मुनि किसी भी समय स्वर्गलोक, पृथ्वीलोक तथा पाताललोक का भ्रमण कर सकते हैं। यह माना जाता है कि, देवर्षि नारद पृथ्वी के प्रथम पत्रकार हैं। नारद मुनि समस्त सूचनाओं का सञ्चार करने हेतु ब्रह्माण्ड में भ्रमण करते रहते हैं। हालाँकि, प्रकार को अधिकांश समय पर उनकी सूचना वाद विवाद को जन्म देती है, किन्तु यह वाद- विवाद ब्रह्माण्ड के हित के लिये होता है। विष्णु व विष्णु  देवर्षि नारद, भगवान नारायण अर्थात के परम भक्त हैं چ भगवान नारायण रूप को सत्य का अवतार माना जाता है। भारतीय पूर्णिमान्त कैलेण्डर के अनुसार ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि 37 को नारद जयन्ती मनायी जाती है। दक्षिण भारतीय अमवस्यान्त कैलेण्डर के अनुसार, नारद जयन्ती वैशाख माह की कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि को होती है। हालाँकि, यह किन्तु दोनों ही प्रकार के कैलेण्डर में नारद जयन्ती चन्द्र माह के भिन्न-भिन्न नाम हैं एक ही दिन पड़ती है। धारणतः नारद जयन्ती बुद्ध_ पूर्णिमा के अगले दिन आती है। यदि प्रतिपदा तिथि का तो बुद्ध पूर्णिमा तथा नारद जयन्ती एक ही दिन हो सकते हैं। ह्रास होता है, नारद जयन्ती २०२६ नारद जयन्ती को देवर्षि नारद मुनि के जन्मदिवस की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जाता है। वैदिक तथा कथाओं के अनुसार, देवर्षि नारद एक सार्वभौमिक पुराणों : देवदूत तथा देवताओं के लिये समस्त प्रकार की जानकारी के प्राथमिक स्रोत हैं नारद मुनि किसी भी समय स्वर्गलोक, पृथ्वीलोक तथा पाताललोक का भ्रमण कर सकते हैं। यह माना जाता है कि, देवर्षि नारद पृथ्वी के प्रथम पत्रकार हैं। नारद मुनि समस्त सूचनाओं का सञ्चार करने हेतु ब्रह्माण्ड में भ्रमण करते रहते हैं। हालाँकि, प्रकार को अधिकांश समय पर उनकी सूचना वाद विवाद को जन्म देती है, किन्तु यह वाद- विवाद ब्रह्माण्ड के हित के लिये होता है। विष्णु व विष्णु  देवर्षि नारद, भगवान नारायण अर्थात के परम भक्त हैं چ भगवान नारायण रूप को सत्य का अवतार माना जाता है। भारतीय पूर्णिमान्त कैलेण्डर के अनुसार ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि 37 को नारद जयन्ती मनायी जाती है। दक्षिण भारतीय अमवस्यान्त कैलेण्डर के अनुसार, नारद जयन्ती वैशाख माह की कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि को होती है। हालाँकि, यह किन्तु दोनों ही प्रकार के कैलेण्डर में नारद जयन्ती चन्द्र माह के भिन्न-भिन्न नाम हैं एक ही दिन पड़ती है। धारणतः नारद जयन्ती बुद्ध_ पूर्णिमा के अगले दिन आती है। यदि प्रतिपदा तिथि का तो बुद्ध पूर्णिमा तथा नारद जयन्ती एक ही दिन हो सकते हैं। ह्रास होता है, - ShareChat