ShareChat
click to see wallet page
search
।। ॐ ।। न च मत्स्थानि भूतानि पश्य मे योगमैश्वरम्। भूतभृन्न च भूतस्थो ममात्मा भूतभावनः॥ वस्तुतः सब भूत भी मुझमें स्थित नहीं हैं क्योंकि वे मरणधर्मा हैं, प्रकृति के आश्रित हैं; किन्तु मेरी योगमाया के ऐश्वर्य को देख कि जीवधारियों को उत्पन्न और पोषण करनेवाला मेरा आत्मा भूतों में स्थित नहीं है। मैं आत्मस्वरूप हूँ, इसलिये मैं उन भूतों में स्थित नहीं हूँ। यही योग का प्रभाव है। इसको स्पष्ट करने के लिये योगेश्वर श्रीकृष्ण दृष्टान्त देते हैं-"यथार्थ गीता" #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #यथार्थ गीता
❤️जीवन की सीख - I 3 I1 भूतानि पश्य मे योगमैश्वरम्।  नच मत्स्थानि भूतभृन्न च भूतस्थो ममात्मा भूतभावनः।l वस्तुतः सब भूत भी मुझमें स्थित नहीं हैं क्योंकि वे मरणधर्मा हैं সকৃনি ক আাপসিন ট; f4 मेरी योगमाया के ऐश्वर्य को देख कि जीवधारियों को उत्पन्न और पोषण करनेवाला मेरा आत्मा भूतों में स्थित नहीं है। मैं आत्मस्वरूप हूँ॰ इसलिये मैं उन भूतों में स्थित नहीं हूँा यही योग का प्रभाव है। इसको स्पष्ट करने के लिये ua श्रीकृष्ण  दृष्टान्त देते हैं -"यथार्थ गीता" I 3 I1 भूतानि पश्य मे योगमैश्वरम्।  नच मत्स्थानि भूतभृन्न च भूतस्थो ममात्मा भूतभावनः।l वस्तुतः सब भूत भी मुझमें स्थित नहीं हैं क्योंकि वे मरणधर्मा हैं সকৃনি ক আাপসিন ট; f4 मेरी योगमाया के ऐश्वर्य को देख कि जीवधारियों को उत्पन्न और पोषण करनेवाला मेरा आत्मा भूतों में स्थित नहीं है। मैं आत्मस्वरूप हूँ॰ इसलिये मैं उन भूतों में स्थित नहीं हूँा यही योग का प्रभाव है। इसको स्पष्ट करने के लिये ua श्रीकृष्ण  दृष्टान्त देते हैं -"यथार्थ गीता" - ShareChat