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#दिल💖के अल्फ़ाज़✍️ #💝 इज़हार-ए-मोहब्बत #💞मोहब्बत💔दिल💘से💞 ## तुम हमेशा मेरे❤️दिल में रहोगे #🤗 प्यार का इज़हार
दिल💖के अल्फ़ाज़✍️ - अगर दिलबर न हो दिल में तो जीने का मजा क्या है। इश्क़ हो शामिल तो पीने का मजा क्या है। ೯ कहीं हो राह की रौनक़ सफ़र की अपनी है ज़ीनत, जिगर जो चाक ना हो पाये , सीने का मज़ा क्या है। भँवर की गोद में सोए हैं जितने ख़्वाब आँखों के, से ना उलझी , सफ़ीने क्या है। ডl तूफ़ानों ೫ #l तपिश जो जेठ की सहकर ये सावन आये भी तो क्या, बिना हसरत के बारिश के महीने मज़ा .क्या है। क चमक उठती है हर इक चोट पर जो ज़ख्म ए उल्फ़त की॰ अंगूठी में ना तो   नगीने मज़ा क्या है। जड @ सुर्ख़ ना हो   तो .लहू का मर्तबा क्या है जो तपकर I पसीने मज़ा क्या है। जिगर बहते ख़ूने- क। पाएजो, को अगर मुहब्बत सूरज' ख़ुदा ना HIन बिना उल्फ़त वो क्या समझे, मदीने मज़ा क्या है! क। 80 अगर दिलबर न हो दिल में तो जीने का मजा क्या है। इश्क़ हो शामिल तो पीने का मजा क्या है। ೯ कहीं हो राह की रौनक़ सफ़र की अपनी है ज़ीनत, जिगर जो चाक ना हो पाये , सीने का मज़ा क्या है। भँवर की गोद में सोए हैं जितने ख़्वाब आँखों के, से ना उलझी , सफ़ीने क्या है। ডl तूफ़ानों ೫ #l तपिश जो जेठ की सहकर ये सावन आये भी तो क्या, बिना हसरत के बारिश के महीने मज़ा .क्या है। क चमक उठती है हर इक चोट पर जो ज़ख्म ए उल्फ़त की॰ अंगूठी में ना तो   नगीने मज़ा क्या है। जड @ सुर्ख़ ना हो   तो .लहू का मर्तबा क्या है जो तपकर I पसीने मज़ा क्या है। जिगर बहते ख़ूने- क। पाएजो, को अगर मुहब्बत सूरज' ख़ुदा ना HIन बिना उल्फ़त वो क्या समझे, मदीने मज़ा क्या है! क। 80 - ShareChat