#श्री हरि विष्णु
दानुद्धरते जगन्ति वहते भूगोलमुद्बिभ्रते
दैत्यं दारयते बलिं छलयते क्षत्रक्षयं कुर्वते ।
पौलस्त्यं जयते हलं कलयते कारुण्यमातन्वते
म्लेच्छान् मूर्च्छयते दशाकृतिकृते कृष्णाय तुभ्यं नमः ॥
[ जयदेव कृत दशावतार स्तोत्र , अन्तिम श्लोक- 'गीतगोविन्दम्' ]
अर्थात् 👉🏻 " वेदों का उद्धार करने वाले , जगत को धारण करने वाले , भूगोल ( पृथ्वी ) को धारण करने वाले, दैत्य ( हिरण्यकशिपु ) को चीरने वाले , बलि को छलने वाले , क्षत्रियों का क्षय ( नाश ) करने वाले , पौलस्त्य ( रावण ) को जीतने वाले , हल धारण करने वाले , करुणा का विस्तार करने वाले , तथा म्लेच्छों ( दुष्टों ) को मूर्छित ( नाश-नष्ट ) करने वाले , दस अवतार धारण करने वाले हे कृष्ण ! आपको नमस्कार है । "
{ ( मत्स्यरूप होकर ) वेदोंका उद्धार करनेवाले , ( कच्छप होकर ) संसारका भार ढोनेवाले , ( वाराह होकर ) पृथ्वीको पाताल से लानेवाले , ( नृसिंह होकर ) हिरण्यकशिपु दैत्यको मारनेवाले, ( वामन होकर ) राजाबलिको छलनेवाले , ( परशुराम होकर ) क्षत्रियोंका नाश करनेवाले , ( राम होकर ) रावणको जीतनेवाले , ( बलराम होकर ) हलको धारण करनेवाले , ( बुद्ध होकर ) करुणाका विस्तार करनेवाले तथा ( कल्कि होकर ) म्लेच्छोंका नाश करनेवाले इस प्रकार दस अवतार धारण करनेवाले आप श्रीकृष्णभगवान्को नमस्कार
है । }
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄


