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एकदंत संकष्टी चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है. पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं और अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणपति की आराधना करके विशेष वरदान प्राप्त किया जा सकता है और सेहत की समस्या को भी हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती और भगवान शिव नदी के पास बैठे हुए थे तभी अचानक माता पार्वती की चौपड़ खेलने की इच्छा हुई लेकिन वहां उन दोनों के अलावा तीसरा कोई नहीं था जो इस खेल में निर्णायक भूमिका निभाए. समस्या का समाधान करते हुए शिव और पार्वती ने मिलकर एक मिट्टी की मूर्ति बनाई और उसमें जान डाल दी. शिव-पार्वती ने मिट्टी से बने बालक को खेल देखकर सही फैसला लेने का आदेश दिया. खेल में माता पार्वती बार-बार भगवान शिव को मात दे रही थीं। चलते खेल में एक बार गलती से बालक ने माता पार्वती को हारा हुआ घोषित कर दिया. इससे नाराज माता पार्वती ने गुस्से में आकर बालक को श्राप दे दिया और वह लंगड़ा हो गया. बालक ने अपनी भूल के लिए माता से बार-बार क्षमा मांगी. बालक के निवेदन को देखते हुए माता ने कहा कि अब श्राप वापस नहीं हो सकता लेकिन एक उपाय से श्राप से मुक्ति पाई जा सकती है. माता ने कहा कि संकष्टी वाले दिन पूजा करने इस जगह पर कुछ कन्याएं आती हैं, तुम उनसे व्रत की विधि पूछना और उस व्रत को सच्चे मन से करना। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - ५ मई 2026 मंगलवर एकदन्त संकष्टी चतुर्थी एक्दंत सूंकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित विशेष व्रत है। " एकदंत " गणेश जी का एकॅ नाम है॰, जो उनके एक दांत वाले स्वरूप को दर्शाता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है और संकटों को दूर करने वालॉ माना जाता है। ५ मई (मंगलवार) को पड़ रही है। इस वर्ष २०२६ में एकदंत सेकष्टी বনুর্থী दिन भक्त दिनभर व्रत रखकर रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलते हें और गणेश जी की पूजा करते हैे। मान्यता है कि इस् व्रत से सभी विघ्न बाधाएं हैो और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। दूर होती ' VASNU& TIPs ५ मई 2026 मंगलवर एकदन्त संकष्टी चतुर्थी एक्दंत सूंकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित विशेष व्रत है। " एकदंत " गणेश जी का एकॅ नाम है॰, जो उनके एक दांत वाले स्वरूप को दर्शाता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है और संकटों को दूर करने वालॉ माना जाता है। ५ मई (मंगलवार) को पड़ रही है। इस वर्ष २०२६ में एकदंत सेकष्टी বনুর্থী दिन भक्त दिनभर व्रत रखकर रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलते हें और गणेश जी की पूजा करते हैे। मान्यता है कि इस् व्रत से सभी विघ्न बाधाएं हैो और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। दूर होती ' VASNU& TIPs - ShareChat