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ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा 🙏 🌺 सनातन धर्म की गहन परंपराओं में देवी छिन्नमस्ता का स्थान अद्वितीय है। दस महाविद्याओं में छठे स्थान की अधिकारिणी, देवी छिन्नमस्ता का स्वरूप रहस्यमय और शक्ति से परिपूर्ण है। 🔮 देवी छिन्नमस्ता की कथा देवी छिन्नमस्ता का जन्म एक प्रेरणादायक कथा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने अपनी सहचरियों की भूख शांत करने के लिए अपना सिर काटकर अपने रक्त से उन्हें तृप्त किया। यह कथा त्याग, करुणा और आत्मबलिदान का प्रतीक है, जो हमें सिखाती है कि अहंकार और मोह से मुक्त होकर ही सच्ची आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। मार्कंडेय पुराण व शिवपुराण में देवी के इस रूप का विशद वर्णन किया गया है। 📅 छिन्नमस्ता जयंती की तिथि हर वर्ष वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छिन्नमस्ता जयंती मनाई जाती है। यह दिन देवी के विशिष्ट पूजन और साधना के लिए समर्पित होता है। 2026 में यह जयंती 30 अप्रैल को मनाई जाएगी। 🌿 उपासना का महत्व छिन्नमस्ता जयंती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व गहरा है। इस दिन की उपासना से आत्मसंयम, साहस और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। देवी छिन्नमस्ता का सम्बन्ध तन्त्र क्रियाओं से अधिक है, इसलिए वो तान्त्रिकों या योगियों द्वारा ही अधिकतर पूजी जाती हैं। देवी की साधना जिस भाव से की जाए वे उसी रूप में दर्शन देती हैं। जय माँ छिन्नमस्ता 🙏 #मां छिन्नमस्ता जयंती #🌹मां छिन्नमस्ता जयंती🙏 #🙏🏼मां छिन्नमस्ता जयंती 🙏🏼 #मां छिन्नमस्ता जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं #🙏जय माँ काली🌼
मां छिन्नमस्ता जयंती - [re 30-04-26 देवी छिन्नमस्ता प्राकट्योत्सव गुरुवार माँ छिन्नमस्ता प्राकट्योत्सव का अवसर वैशाख महीने में चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। दस महाविद्याओं में शुक्ल पक्ष की छिन्नमस्तिका माता छठी महाविद्या कहलाती हैँ देवी के इस रूप के विषय में कई पौराणिक धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है। [re 30-04-26 देवी छिन्नमस्ता प्राकट्योत्सव गुरुवार माँ छिन्नमस्ता प्राकट्योत्सव का अवसर वैशाख महीने में चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। दस महाविद्याओं में शुक्ल पक्ष की छिन्नमस्तिका माता छठी महाविद्या कहलाती हैँ देवी के इस रूप के विषय में कई पौराणिक धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है। - ShareChat