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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - अटूट विश्वास टूट गया जो था मजबूत वो ढह गया देख परख कर परखा था मनकालगतासच्चा था पर दिग भ्रम वह टूट गया शीशा था हाथ से छिटक गया अब टुकड़ों को क्या जोडूं मैं किससे अपनी पीठ मरोड़ूं मैं जो साया बनकर साथ चला वो राह में ही मुख मोड़ गया थी भूल मेरी या शत्रु का छल आँखों में तैरता आज है जल जिस नींव पे ख्वाब सजाए थे वह रेत की मानिंद ढह गया पर टूटे शीशे की किरचों से एक नया सबक अब पाना है धोखे की इस गहरी धुंध से खुद को ही बाहर लाना है चोट लगी है दर्द भी गहरा है पर भीतर मेरे एक खुद्दारी है विश्वास उठा है गैरों से पर अब खुद से वफ़ा की बारी है स्वाती छीपा अटूट विश्वास टूट गया जो था मजबूत वो ढह गया देख परख कर परखा था मनकालगतासच्चा था पर दिग भ्रम वह टूट गया शीशा था हाथ से छिटक गया अब टुकड़ों को क्या जोडूं मैं किससे अपनी पीठ मरोड़ूं मैं जो साया बनकर साथ चला वो राह में ही मुख मोड़ गया थी भूल मेरी या शत्रु का छल आँखों में तैरता आज है जल जिस नींव पे ख्वाब सजाए थे वह रेत की मानिंद ढह गया पर टूटे शीशे की किरचों से एक नया सबक अब पाना है धोखे की इस गहरी धुंध से खुद को ही बाहर लाना है चोट लगी है दर्द भी गहरा है पर भीतर मेरे एक खुद्दारी है विश्वास उठा है गैरों से पर अब खुद से वफ़ा की बारी है स्वाती छीपा - ShareChat