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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - numal டhunununழshalLon जब कभी भी हमारा अपमान हयो तो उससे विचलित ना हों अपने भक्त का हित करने का ढंग भी भगवान का निराला है। औ  किसी बच्चे को फोड़ा हो जाए तो उसकी मां उसका इलाज कराती उसमें भी पीडा़ है लेकिन मां जानती है कि भविष्य में यह फोड़ा  तकलीफ नहीं देंगा। ऐसे ही भगवान अपने भक्तों की स्थिति-परिस्थिति में चीर फाड़ करते रहते हैं। उनमें से एक है- अहंकार। किसी भी सफर पर निकलें तो सामान का वजन कम से कम हो तो सुविधाजनक होता है। सफर में तीन पड़ाव हैं- पहला है बैठना, दूसरा चलँना, तीसरा # ওনাং हमारे जीवन में भी गर्भाधान बैठना है मकान दुकान चलना है श्मशान उतरना है। इन तीनों के बीच की यात्रा मेँ हम अभिमान रूपी वजन सिर पर रखते हैं और वजन अधिक हो तो चाल लड़खड़ाएगी ही।  तुलसीदास जी ने लिखा है- तिमि रघुपति निज दास कर हरहिं मान हित  लागि। श्रीराम अपने दास का अभिमान उसके हित के लिए हर लेते है। जब कभी हमारा अपमान हो तो विचलित ना हों॰ बल्कि सोचें कि यह  हमें अभिमान रहित करने के लिए किया गया है। Facebook Pt Vijayshankar Mehta numal டhunununழshalLon जब कभी भी हमारा अपमान हयो तो उससे विचलित ना हों अपने भक्त का हित करने का ढंग भी भगवान का निराला है। औ  किसी बच्चे को फोड़ा हो जाए तो उसकी मां उसका इलाज कराती उसमें भी पीडा़ है लेकिन मां जानती है कि भविष्य में यह फोड़ा  तकलीफ नहीं देंगा। ऐसे ही भगवान अपने भक्तों की स्थिति-परिस्थिति में चीर फाड़ करते रहते हैं। उनमें से एक है- अहंकार। किसी भी सफर पर निकलें तो सामान का वजन कम से कम हो तो सुविधाजनक होता है। सफर में तीन पड़ाव हैं- पहला है बैठना, दूसरा चलँना, तीसरा # ওনাং हमारे जीवन में भी गर्भाधान बैठना है मकान दुकान चलना है श्मशान उतरना है। इन तीनों के बीच की यात्रा मेँ हम अभिमान रूपी वजन सिर पर रखते हैं और वजन अधिक हो तो चाल लड़खड़ाएगी ही।  तुलसीदास जी ने लिखा है- तिमि रघुपति निज दास कर हरहिं मान हित  लागि। श्रीराम अपने दास का अभिमान उसके हित के लिए हर लेते है। जब कभी हमारा अपमान हो तो विचलित ना हों॰ बल्कि सोचें कि यह  हमें अभिमान रहित करने के लिए किया गया है। Facebook Pt Vijayshankar Mehta - ShareChat