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🏔️ अंतर्राष्ट्रीय माउंट एवरेस्ट दिवस (29 मई) 🏔️ आज का दिन इतिहास के उस स्वर्णिम पल को सलाम करने का है, जब इंसानी हौसले ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को फतह किया था! 🇳🇵🇳🇿 क्या आप जानते हैं? 🧗‍♂️ 29 मई 1953 को सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे शेरपा ने पहली बार एवरेस्ट पर कदम रखा था। 🏔️ नेपाल में इसे 'सागरमाथा' और तिब्बत में 'चोमोलुंगमा' कहा जाता है। 📈 टेक्टोनिक प्लेट्स की वजह से एवरेस्ट आज भी हर साल लगभग 4 मिलीमीटर बढ़ रहा है। ⚠️ 8,000 मीटर से ऊपर का हिस्सा 'डेथ ज़ोन' कहलाता है, जहाँ ऑक्सीजन की भारी कमी होती है। सलाम है उन सभी जांबाज पर्वतारोहियों और शेरपाओं को, जिन्होंने अपने साहस से इतिहास लिखा! 🙏✨ इस अद्भुत और जानकारी से भरपूर 8K Ultra HD इंफोग्राफिक पोस्टर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और कमेंट में बताएं कि क्या आप इस 'डेथ ज़ोन' के बारे में जानते थे? 👇 #MountEverestDay #MountEverest #29May #Sagarmatha #Motivation #Himalayas #Trending #ShareChatViral #mount everest #अन्तरराष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस #एवरेस्ट #माउन्ट एवरेस्ट दिवस #इन्टरनेशल माउंट एवरेस्ट डे
mount everest - अंतरयष्ट्रीय माउंट एवरेस्ट दिवस 29 3 इंसानी हौसले और साहस का पर्व! इतिहास की वह तारीख! सुनहरी २९ मई १९५३ः सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे ने पहली बार एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखा. TIBET एक चोटी , अनेक नाम नेपाल ' MIPRIಚ चोमोलुंगमा নিল্পন সঃ ऊंचाईः 8 ८४८ ८६ मीटर चोटी जो हमेशा बढ़ रही है! टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने से हर साल लगभग 4 भिमी बढ़ रही है. सावधानः डेथ ज़ोन (Death Zone) ८,००० मीटर से ऊपर , जहाँ ऑक्सीजन बेहद कम होती है. सलाम शेरपाओं और पर्वतारोहियों उनके जज्बे , मेहनत और बलिदान को नमन. अंतरयष्ट्रीय माउंट एवरेस्ट दिवस 29 3 इंसानी हौसले और साहस का पर्व! इतिहास की वह तारीख! सुनहरी २९ मई १९५३ः सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे ने पहली बार एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखा. TIBET एक चोटी , अनेक नाम नेपाल ' MIPRIಚ चोमोलुंगमा নিল্পন সঃ ऊंचाईः 8 ८४८ ८६ मीटर चोटी जो हमेशा बढ़ रही है! टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने से हर साल लगभग 4 भिमी बढ़ रही है. सावधानः डेथ ज़ोन (Death Zone) ८,००० मीटर से ऊपर , जहाँ ऑक्सीजन बेहद कम होती है. सलाम शेरपाओं और पर्वतारोहियों उनके जज्बे , मेहनत और बलिदान को नमन. - ShareChat