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#जय श्री कृष्ण मधुर ध्वनि कहुं दूर ते आवै कान्ह बजावत बेनु चढि बंसीवट मोहन बैठ्यौ चरत रहीं सब धेनु झिलमिलात रवि जमुनाजलते रतन सी चमकत रेनु कृष्णांगी प्रभु छवि मनोहर भए मोहित मोरै नैनु... मैं मेरौ भयौ तोरौ मोहन सभै समर्पण तोहे नाथ सौंप दियौ तोकौ ये जीवन एक सहारौ तोरौ ही साथ काम क्रोध अरू लोभ मोह मद बैठे शत्रु लेके घात चाहे डुबा दौ चाहै तरा दो नैया मोरी तोरे हाथ टूट रहे सब मोह के धागे घोर अंधेरी छाई रात धरि वैष्णव कौ रूप गिरि धर गहि बांह मोहै लेवत जात मन मां गूंजत शरण मंत्र है हिय में तोरे गुन ही गात कृष्णांगी प्रभु नटवर नागर छबि मोहिनी नैन बसात... .
जय श्री कृष्ण - ShareChat