"प्रशांत किशोर (PK) कोई जननेता नहीं, बल्कि राजनीति के 'कॉर्पोरेट ब्रोकर' हैं। जो व्यक्ति कल तक नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, जगनमोहन रेड्डी और कांग्रेस जैसी अलग-अलग विचारधारा वाली पार्टियों को सत्ता दिलाने के लिए सौदेबाजी करता था, वो आज अचानक बिहार का मसीहा कैसे बन गया?उनकी राजनीति का सच यह है:विचारधारा शून्य: जिस व्यक्ति की अपनी कोई राजनीतिक विचारधारा ही नहीं है, जो पैसों के लिए किसी भी दल की ब्रांडिंग कर सकता है, वो जनता के अधिकारों की लड़ाई क्या लड़ेगा?सिर्फ डेटा का धंधा: जन सुराज के नाम पर उन्होंने बिहार के लाखों युवाओं के मोबाइल नंबर और डेटा जुटाए, ताकि कल को किसी बड़ी पार्टी से फिर से करोड़ों की डील की जा सके। यह राजनीति नहीं, डेटा माइनिंग का बिजनेस है।अहंकार और खोखले दावे: हालिया चुनावों में उनकी ज़मीनी हकीकत दुनिया ने देख ली। लैपटॉप और एसी कमरों में बैठकर आंकड़े बदलने वाले PK बूथ स्तर पर एक मजबूत संगठन तक नहीं बना पाए। उनके बड़े-बड़े दावे और अहंकार जनता के सामने पूरी तरह फ्लॉप साबित हुए।बिहार को लैपटॉप वाले मैनेजरों की नहीं, ज़मीन पर खून-पसीना बहाने वाले नेताओं की जरूरत है। पीके साहब, बिहार की जनता जागरूक है, वो आपकी इस 'कॉर्पोरेट री-ब्रांडिंग' के झांसे में आने वाली नहीं है!" #📰 बिहार अपडेट #🎤जन सुराज पार्टी 🙏 #🎤प्रशांत किशोर #🤓इलेक्शन मीम्स😆 #🤓इलेक्शन मीम्स😆 #🔥लालू यादव 📢
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