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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - तीरथु तप्रु दइआ दतु दानु। जेको पावै तिल का मानुँग श्री गुरु नानक देव जी यहाँ यह समझाना चाहते हैं कि मै तेरा केवल तीर्थों पर नहाने या दान देने जैसे बाहरी भिखारी दिखावों से पूर्ण मोक्ष या ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती। इनका फल बहुत सीमित है। असली फल उसे मिलता जिओ है जिसने प्रभु का नाम सुना, उस पर विश्वास किया और मन में उसके प्रति प्रेम पैदा किया। अपने हृदय के पहाडा भीतर के तीर्थ में नाम रूपी अमृत से स्नान करना ही বাল सबसे बड़ा पुण्य है। अर्थः तीर्थ स्थानों की यात्रा करना, शरीर को कष्ट देकर तप करना , पर दया दूसरों 1 बाबा करना और दान पुण्य करना ये सभी कर्म धार्मिक माने जाते हैं। लेकिन इन बाहरी कर्मों से परमात्मा की जी दरगाह में केवल तिल मात्र मान सम्मान ही मिलता है। तीरथु तप्रु दइआ दतु दानु। जेको पावै तिल का मानुँग श्री गुरु नानक देव जी यहाँ यह समझाना चाहते हैं कि मै तेरा केवल तीर्थों पर नहाने या दान देने जैसे बाहरी भिखारी दिखावों से पूर्ण मोक्ष या ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती। इनका फल बहुत सीमित है। असली फल उसे मिलता जिओ है जिसने प्रभु का नाम सुना, उस पर विश्वास किया और मन में उसके प्रति प्रेम पैदा किया। अपने हृदय के पहाडा भीतर के तीर्थ में नाम रूपी अमृत से स्नान करना ही सबसे बड़ा पुण्य है। अर्थः तीर्थ स्थानों की यात्रा करना, शरीर को कष्ट देकर तप करना , पर दया दूसरों 1 बाबा करना और दान पुण्य करना ये सभी कर्म धार्मिक माने जाते हैं। लेकिन इन बाहरी कर्मों से परमात्मा की जी दरगाह में केवल तिल मात्र मान सम्मान ही मिलता है। - ShareChat