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नारद जयंती नारद मुनि ब्रह्मा के सात मानस पुत्रों में से एक हैं. हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिप्रदा तिथि को नारद जयंती (Narad Jayanti ) के रूप में मनाया जाता है. आमतौर पर नारद मुनि को लेकर धारणा है कि वे इधर-उधर घूमकर चुगलबाजी करते रहते हैं, लेकिन ये बिल्कुल गलत धारणा है लेकिन ये बिल्कुल गलत धारणा है. वास्तव में देवर्षि नारद (Devarshi Narad) ही थे जो एक लोक से दूसरे लोक में घूमते हुए एक सार्थक संवाददाता की भूमिका निभाते थे और धरती लोक के मनुष्यों के दुख-दर्द की सूचना देव लोक तक पहुंचाते थे. इसीलिए नारद मुनि को धरती का पहला पत्रकार माना जाता है. आज नारद जयंती के मौके पर जानिए नारद मुनि से जुड़ी तमाम बातें। देवर्षि नारद भगवान विष्णु के परम भक्त थे. वे हर वक्त जुबां पर नारायण का ही नाम जपते रहते थे और प्रभु के सच्चे दूत के रूप में अपना कार्य करते थे. नारद मुनि को वरदान था कि वे कभी भी किसी भी लोक में जा सकते हैं. इसलिए वे देवलोक, पृथ्वी लोक और पाताल लोक में भ्रमण करते थे और वहां की सूचनाओं को भगवान विष्णु तक पहुंचाते थे. बात चाहे रावण वध की हो, या कंस और बाली के वध की, महाभारत हो या देवताओं और असुरों के बीच संग्राम, हर जगह पर नारद मुनि ने एक स्पॉट रिपोर्टर की भूमिका को निभाया है. उन्होंने न सिर्फ धरती लोक की स्थिति से श्रीहरि को वाकिफ कराया, बल्कि धरती पर भी अत्याचारियों को कई बार उनकी करनी के परिणाम को लेकर भी चेताया है। #शुभ कामनाएँ 🙏
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