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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - थथा थिरु कोऊं नही काइ पसारहु पाव।। अनिक बंच बल छल करहु माइआ एक उपावाथैली  संचहु स्रमु करहु थाकि परहु घावार $ भन कै कामि न आवई अंते अउसर बार।। के माध्यम से गुरु जी समझाते हैं कि इस संसार में अर्थः थथा अक्षर' ম নয कुछ भी थिरु (स्थिर या स्थायी ) नहीं है। फिर हे जीव! व्यर्थ में तू क्यों इतने पैर पसार रहा है और लोभ मोह का विस्तार कर रहा है? मनुष्य भिखारी अक्सर यह भूल जाता है कि वह यहाँ मात्र एक मुसाफिर है और वह इंतज़ाम ऐसे करता है जैसे उसे यहाँ सदा रहना हो। माया एकत्रित करने जिओ के लिए मनुष्य अनेक प्रकार की ठगी , बल और छल कपट का सहारा तू दिन रात कडी ' करके धन की थैलियाँ बटोरने ddI గI గె मेहनत ' पहाडा मूर्ख! में लगा रहता है और अंत में थक कर हार जाता है। पूरी उम्र पैसे के पीछे वाले भागते भागते तू शारीरिक और मानसिक रूप से टूट जाता है, लेकिन तेरी तृष्णा (लालसा ) कभी खत्म नहीं होती। IqI याद रख, यह संचित किया हुआ धन अंत समय में तेरे मन के किसी काम नहीं आएगा और न ही परलोक के सफर में तेरा साथ देगा। मृत्यु के समय जी केवल मनुष्य के कर्म और परमात्मा का नाम ही साथ जाता है, बाकी है। गुरु ' सारी सांसारिक दौलत यहीं धरी रह जाती ' साहिब जी सचेत करते हैं कि उस वस्तु के लिए अपनी आत्मा का सौदा न कर जो अंत समय में ही न आए। तू मेहनत तो कर, लेकिन छल और अंधे लोभ से काम बचकर उस परमात्मा से जुड़ जो वास्तव में स्थायी है। थथा थिरु कोऊं नही काइ पसारहु पाव।। अनिक बंच बल छल करहु माइआ एक उपावाथैली  संचहु स्रमु करहु थाकि परहु घावार $ भन कै कामि न आवई अंते अउसर बार।। के माध्यम से गुरु जी समझाते हैं कि इस संसार में अर्थः थथा अक्षर' ম নয कुछ भी थिरु (स्थिर या स्थायी ) नहीं है। फिर हे जीव! व्यर्थ में तू क्यों इतने पैर पसार रहा है और लोभ मोह का विस्तार कर रहा है? मनुष्य भिखारी अक्सर यह भूल जाता है कि वह यहाँ मात्र एक मुसाफिर है और वह इंतज़ाम ऐसे करता है जैसे उसे यहाँ सदा रहना हो। माया एकत्रित करने जिओ के लिए मनुष्य अनेक प्रकार की ठगी , बल और छल कपट का सहारा तू दिन रात कडी ' करके धन की थैलियाँ बटोरने ddI గI గె मेहनत ' पहाडा मूर्ख! में लगा रहता है और अंत में थक कर हार जाता है। पूरी उम्र पैसे के पीछे वाले भागते भागते तू शारीरिक और मानसिक रूप से टूट जाता है, लेकिन तेरी तृष्णा (लालसा ) कभी खत्म नहीं होती। IqI याद रख, यह संचित किया हुआ धन अंत समय में तेरे मन के किसी काम नहीं आएगा और न ही परलोक के सफर में तेरा साथ देगा। मृत्यु के समय जी केवल मनुष्य के कर्म और परमात्मा का नाम ही साथ जाता है, बाकी है। गुरु ' सारी सांसारिक दौलत यहीं धरी रह जाती ' साहिब जी सचेत करते हैं कि उस वस्तु के लिए अपनी आत्मा का सौदा न कर जो अंत समय में ही न आए। तू मेहनत तो कर, लेकिन छल और अंधे लोभ से काम बचकर उस परमात्मा से जुड़ जो वास्तव में स्थायी है। - ShareChat