*विहितस्याननुष्ठानात्*
*निन्दितस्य च सेवनात्।*
*अनिग्रहाच्चेन्द्रियाणां*
*नरः पतनमृच्छति।।*
(या स्मृतिः - ०२-०६)
अर्थात् - निर्धारित कर्तव्य का पालन नहीं करने से, वर्जित और निंदित पदार्थ का सेवन करने से, इंद्रियों पर संयम नहीं रखने से मनुष्य पतन को प्राप्त करता है। अतः अपनी उन्नति के लिए इनका कड़ाई से पालन करना चाहिए।
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