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..ℂ - Author on ShareChat
❤𝕍.𝕂.ℂ𝕣𝕖𝕒𝕥𝕚𝕠𝕟❤
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#मेरे प्यारे दोस्तों मेरी अच्छी पोस्ट को दिखने के लिए sharechat पे follow करे....... ......धन्यवाद। #🖋️ कबीर दास जी के दोहे #कबीर दोहे
५ प्रसिद्ध दोहे अर्थ सहित देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय 1 बुरा जो ( मुझसे बुरा न कोय जो मन खोजा आपना, | | স বুসহী স ব্রুবান ঐস্রন নিকলা, নী কীরন্ ব্রুহা নন্ী সিলা ! अर्थः जब मैंने अपने मन को टटोला, तो बुरा कोई नहीं निकला। gsT সন efR?-efR? ? धीरे सब कुछ होय | 2 मना, माली सींचे सौ घड़़ा , ऋतु आए फल होय ।। 31*: हे मन! धैर्य रखो, सब कुछ धीरे-धीरे होता है। जैसे माली सौ घड़े पानी देता है, फिर भी फल ऋतु आने पर ही होते हैं। साई इतना दीजिए, जा मे कुटुम समाय 3 मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय ।। अर्थः हे प्रभु! मुझे इतनी ही देन दीजिए जिसमें मेरा परिवार चल जाए। मैं भी भूखा न रहूँ और मेरे द्वार आने वाला साधु भी भूखा न जाए। निंदक नियरे राखिए, आँगन ತಾಿ 8ಾ | बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय I 31*: निंदक (आलोचक) को हमेशा पास रखना चाहिए, उसे अपने साबुन के चाहिए। वह बिना पानी और आँगन में कुटिया बनाकर रखना ही आपके स्वभाव को निर्मल कर देता है। चलती चाकी देख कर, दिया कबीरा रोय | 5 दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोय ।। चलती हुई चक्की को देखकर कबीर रो पडे़। 31*: दो पाटों के बीच में कोई भी साबुत (बचकर) नहीं रह पाता। दोहे हमारे जीवन को सही दिशा दिखाते हैं और हमें श्रेष्ठ इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं। ५ प्रसिद्ध दोहे अर्थ सहित देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय 1 बुरा जो ( मुझसे बुरा न कोय जो मन खोजा आपना, | | স বুসহী স ব্রুবান ঐস্রন নিকলা, নী কীরন্ ব্রুহা নন্ী সিলা ! अर्थः जब मैंने अपने मन को टटोला, तो बुरा कोई नहीं निकला। gsT সন efR?-efR? ? धीरे सब कुछ होय | 2 मना, माली सींचे सौ घड़़ा , ऋतु आए फल होय ।। 31*: हे मन! धैर्य रखो, सब कुछ धीरे-धीरे होता है। जैसे माली सौ घड़े पानी देता है, फिर भी फल ऋतु आने पर ही होते हैं। साई इतना दीजिए, जा मे कुटुम समाय 3 मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय ।। अर्थः हे प्रभु! मुझे इतनी ही देन दीजिए जिसमें मेरा परिवार चल जाए। मैं भी भूखा न रहूँ और मेरे द्वार आने वाला साधु भी भूखा न जाए। निंदक नियरे राखिए, आँगन ತಾಿ 8ಾ | बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय I 31*: निंदक (आलोचक) को हमेशा पास रखना चाहिए, उसे अपने साबुन के चाहिए। वह बिना पानी और आँगन में कुटिया बनाकर रखना ही आपके स्वभाव को निर्मल कर देता है। चलती चाकी देख कर, दिया कबीरा रोय | 5 दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोय ।। चलती हुई चक्की को देखकर कबीर रो पडे़। 31*: दो पाटों के बीच में कोई भी साबुत (बचकर) नहीं रह पाता। दोहे हमारे जीवन को सही दिशा दिखाते हैं और हमें श्रेष्ठ इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं।
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