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Supreme Court - supreme court ne kaha mahilao ko homecare ke bajay nation bildar kahna chahiye #supreme court
supreme court - सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा, ' गृहिणी को होममेकर के बजाय नेशन बिल्डर कहना चाहिए।' कोर्ट की यह टिप्पणी दुर्घटना में महिला की मौत से जुड़े एक मुआवजा केस में आई। कोर्ट ने सुप्रीम कहा कि जब किसी दुर्घटना के कारण गृहिणी की मौत हो जाती है, तब उसका मुआवजा तय करते उसके योगदान का आकलन जरूरी है। कोर्ट ने कहा, 'एक गृहिणी का काम केवल खाना बनाना, सुप्रीम बच्चों की देखभाल और घर संभालना नहीं है। वह परिवार की नींव को मजबूत बनाती है, अगली पीढ़ी तैयार करती है। '  जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह इसके बाद जस्टिस संजय करोल और की बेंच ने दुर्घटना की शिकार गृहणियों के मामले में एक नई गाइडलाइन जारी की। कहा कि ३० हजार रुपए महीना के हिसाब से मुआवजा तय किया जाना चाहिए। इसके बाद बीमा कंपनी को मामले में पति को अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया। इस GAld एक गृहिणी के घर के काम की वैल्यू " निकाली जाए तो उसकी अनुमानित : आय ३० हजार रुपए प्रतिमाह बनती है। इसलिए बीमा कंपनियों को दुर्घटना मुआवजा तय करते समय उनके योगदान को केवल सांकेतिक या कम करके नहीं आंका जा सकता। कोर्ट सुप्रीम  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा, ' गृहिणी को होममेकर के बजाय नेशन बिल्डर कहना चाहिए।' कोर्ट की यह टिप्पणी दुर्घटना में महिला की मौत से जुड़े एक मुआवजा केस में आई। कोर्ट ने सुप्रीम कहा कि जब किसी दुर्घटना के कारण गृहिणी की मौत हो जाती है, तब उसका मुआवजा तय करते उसके योगदान का आकलन जरूरी है। कोर्ट ने कहा, 'एक गृहिणी का काम केवल खाना बनाना, सुप्रीम बच्चों की देखभाल और घर संभालना नहीं है। वह परिवार की नींव को मजबूत बनाती है, अगली पीढ़ी तैयार करती है। '  जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह इसके बाद जस्टिस संजय करोल और की बेंच ने दुर्घटना की शिकार गृहणियों के मामले में एक नई गाइडलाइन जारी की। कहा कि ३० हजार रुपए महीना के हिसाब से मुआवजा तय किया जाना चाहिए। इसके बाद बीमा कंपनी को मामले में पति को अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया। इस GAld एक गृहिणी के घर के काम की वैल्यू " निकाली जाए तो उसकी अनुमानित : आय ३० हजार रुपए प्रतिमाह बनती है। इसलिए बीमा कंपनियों को दुर्घटना मुआवजा तय करते समय उनके योगदान को केवल सांकेतिक या कम करके नहीं आंका जा सकता। कोर्ट सुप्रीम - ShareChat