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#बेशक# ज़िक्र ए हैदरعके समंदर की कोई थाह नहीं
बेशक# - [ಊ೮೬] = ಕ್ರ್ರಿಹತ್ರಪತವಕಂೊತಾಹಹತ್ ಭತ್ರಠತ g9 ` राहे मिदहत के सिवा कोई मेरी नहीं राह इसलिये जमाने की कोई चाह नहीं !! मुझको  गोताजन मदहा के दरिया के यही कहते हैं ! जिक्रे हैदर के समन्दर की कोई थाह नहीं !! हम सदा करते रहेंगे शहे वाला की सना दुश्मन हैं जो उनकी हमें परवाह नहीं !! इसके जुल्म पर जुल्म किये जाते हैं जो  दुनिया में ! मौत से अपनी वो शायद अभी आगाह नहीं !! सर रहे हक पा कटाने की तमन्ना रखिये हक की ऐ दोस्तो आसान कोई राह नहीं !! फिर तुम्हे कैसे हुसैनी कहे दुनिया में कोई ! दिल में मजलूमों की खातिर जो तेरे आह नहीं !! कहृती है दुनियाय वुफुा ये ध्तनवीरथ ! आच्नक मेडे अब्बासकीj किंस मुल्क में दरगाह्य नहीः ४४  [ಊ೮೬] = ಕ್ರ್ರಿಹತ್ರಪತವಕಂೊತಾಹಹತ್ ಭತ್ರಠತ g9 ` राहे मिदहत के सिवा कोई मेरी नहीं राह इसलिये जमाने की कोई चाह नहीं !! मुझको  गोताजन मदहा के दरिया के यही कहते हैं ! जिक्रे हैदर के समन्दर की कोई थाह नहीं !! हम सदा करते रहेंगे शहे वाला की सना दुश्मन हैं जो उनकी हमें परवाह नहीं !! इसके जुल्म पर जुल्म किये जाते हैं जो  दुनिया में ! मौत से अपनी वो शायद अभी आगाह नहीं !! सर रहे हक पा कटाने की तमन्ना रखिये हक की ऐ दोस्तो आसान कोई राह नहीं !! फिर तुम्हे कैसे हुसैनी कहे दुनिया में कोई ! दिल में मजलूमों की खातिर जो तेरे आह नहीं !! कहृती है दुनियाय वुफुा ये ध्तनवीरथ ! आच्नक मेडे अब्बासकीj किंस मुल्क में दरगाह्य नहीः ४४ - ShareChat