#❤️अस्सलामु अलैकुम♥️#
सदक़ा (दान) भीख मांगने वालों के बजाय अपने क़राबत दारों(करीबी रिश्तेदारों)को दो इसमें बहुत ज़्यादा अजर (पुण्य) है।
[हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ع]
#❤️अस्सलामु अलैकुम♥️#
हम मदह ए अलीعमें,दार पे भी लफ़्ज़ों को रवानी देते हैं।
कटती है ज़ुबाँ कट जाये मगर, पैग़ाम ज़बानी देते हैं।
शाहिद है अदा ए मीसम भी, हम हैं वो अलीعके दीवाने।
जिस पेड़ पे सूली चढ़ना हो, उस पेड़ को पानी देते हैं।।