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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - भीतर का समंदर लहरें उठती हैं, शोर मचाती हैं, किनारों से टकराकर लौट जाती हैं। दुनिया देखती है सिर्फ बाहरी हलचल , हैं। गहराइयां न जाने क्या छुपाती ` दबाए बैठे हैं हम सब एक समंदर , हैं कई ख्वाब इसके अंन्दर| gcTాId . पहने घूमते हैं जो रोज़़ ` मुखौटा , पिघलते हैं तन्हाई में बन मोम अक्सर। पर इन गहराइयों में एक ताकत भी है, हर तूफान से लडने की आदत भी हैं । महज़ रेत का किनारा न समझो, खुद को भीतर असीमित आसमान भी हैं। तुम्हारे स्वाती छीपा ~~~ ~~~ भीतर का समंदर लहरें उठती हैं, शोर मचाती हैं, किनारों से टकराकर लौट जाती हैं। दुनिया देखती है सिर्फ बाहरी हलचल , हैं। गहराइयां न जाने क्या छुपाती ` दबाए बैठे हैं हम सब एक समंदर , हैं कई ख्वाब इसके अंन्दर| gcTాId . पहने घूमते हैं जो रोज़़ ` मुखौटा , पिघलते हैं तन्हाई में बन मोम अक्सर। पर इन गहराइयों में एक ताकत भी है, हर तूफान से लडने की आदत भी हैं । महज़ रेत का किनारा न समझो, खुद को भीतर असीमित आसमान भी हैं। तुम्हारे स्वाती छीपा ~~~ ~~~ - ShareChat