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#ચાણક્ય નીતિ
ચાણક્ય નીતિ - चंद्रगुप्तने आचार्य चाणक्य से सवाल किया : ज़हर क्या है ? आचार्य ने प्रत्युत्तर दिया : "जिँदगी में ज़ो जरूरत से ज्यादा होता क़्ूर चाहे का शतक्ति ह्या दू ह्वा हा है,वो ज़हर है पैसा, धन दौलत एवँ भौतिक संपत्ति ಕ; = लोभ लालच हो, घमँड़ हो, आलस्य हो, प्रेम महत्वकाँक्षा और द्वैष हो... सब कुछ ज़हर है । ' चंद्रगुप्तने आचार्य चाणक्य से सवाल किया : ज़हर क्या है ? आचार्य ने प्रत्युत्तर दिया : "जिँदगी में ज़ो जरूरत से ज्यादा होता क़्ूर चाहे का शतक्ति ह्या दू ह्वा हा है,वो ज़हर है पैसा, धन दौलत एवँ भौतिक संपत्ति ಕ; = लोभ लालच हो, घमँड़ हो, आलस्य हो, प्रेम महत्वकाँक्षा और द्वैष हो... सब कुछ ज़हर है । ' - ShareChat