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- Vinod Prajapati#🌷शुभ गुरुवार #जय श्री राम 🙏 #🙏🌺हर हर🔱महादेव🌺🙏 #🌹🌹 शु भ का म ना सं दे श🌹🌹 #राधे कृष्णा5469
- sn vyas#राधे #राधे राधे #राधे कृष्ण ' कोटि तीरथ जेहि भूमि पर, सीस नवावत आय। ' इस संसार में जितने भी पवित्र और महान तीर्थ स्थल हैं (जैसे काशी, प्रयाग, बद्रीनाथ आदि), वे सब मोक्ष और पुण्य देने वाले माने जाते हैं। लेकिन इस दोहे में कहा गया है कि वे करोड़ों तीर्थ भी स्वयं को धन्य करने और भक्ति का वरदान पाने के लिए इस ब्रजभूमि पर आकर अपना शीश झुकाते हैं। जिस भूमि के कँकड़-पत्थर और धूलि में स्वयं साक्षात ब्रह्म लोट लगाते हों, उस ब्रजभूमि की महिमा के आगे समस्त तीर्थों का वैभव भी छोटा पड़ जाता है। ' सो ब्रज पर श्री लाड़ली, राजत सहज सुभाय।। ' ऐसे परम पावन और त्रिलोक-वंदनीय ब्रजमंडल पर किसी राजा या तानाशाह की तरह बलपूर्वक शासन नहीं चलता, बल्कि वहाँ की एकमात्र स्वामिनी और महारानी हमारी 'श्री लाड़ली जी' (राधा रानी) हैं। वे इस पूरे ब्रज पर किसी राजसी अहंकार से नहीं, बल्कि अपने अत्यंत 'सहज सुभाय' (सरल, करुणामयी और वात्सल्यपूर्ण स्वभाव) से राज करती हैं। उनका यह एकछत्र राज किसी भय पर नहीं, बल्कि केवल और केवल प्रेम और आत्मीयता पर टिका है। जय श्रीकृष्ण.... सदा मन गोकुल में रहीए... .1217
- 🙏💕🌼Bhakti और Bhavnayen🔱🕉️🚩#🌺राधा कृष्ण💞 #राधे कृष्णा #🙏 भक्ति #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स11951
- 🔥͓̽𝑴🦚𝑺🔥͓̽#राधे कृष्ण #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🙏🏻 मेरे भगवान 🙏🏻 #जय श्री श्याम #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇1719
- Shiv kumar chauhan#राधे कृष्णा2016
- 🚩🙏श्री लाड़ली का प्यारा💕💝#shree radhe #राधे राधे जय श्री कृष्ण शुभ रात्रि 🌹🙏🌹 #🌹🌹🙏🙏जय श्री राधे🌹🌹🙏🙏 #श्री राधे कृष्णा #श्री राधे राधे1517
- sn vyas#राधे कृष्ण कहा करूं बैकुंठ लै, कहा मुक्ति की चाह: भक्त कहता है कि हे किशोराधेकरी जी! मुझे उस स्वर्ग या बैकुंठ धाम को लेकर क्या करना है, जहाँ हर प्रकार के वैभव तो हैं, लेकिन आपकी यह रसमय भक्ति नहीं है? मुझे जन्म-मरण के चक्र से छूटने यानी 'मुक्ति' (मोक्ष) की भी कोई अभिलाषा नहीं है। क्योंकि भक्त के लिए मुक्ति का अर्थ प्रभु से दूर होना नहीं, बल्कि उनके प्रेम में डूबे रहना है। मोहे देहु श्री राधिके, चरन कमल की छाह: मेरी केवल एक ही अंतिम और परम इच्छा है कि मुझे सदैव आपके इन परम पावन, अत्यंत कोमल और करुणामयी चरण कमलों की शीतल छाया प्राप्त रहे। आपके चरणों की शरण में जो परम आनंद और शांति है, वह संसार या स्वर्ग के किसी भी सुख में नहीं है। मूल भाव (निष्कर्ष): इस दोहे का मूल भाव 'अनन्य शरणागति' और 'निष्काम प्रेम' है। भक्त भगवान से धन, ऐश्वर्य, स्वर्ग या मोक्ष नहीं मांगता; वह केवल और केवल श्री राधा रानी के चरणों में नित्य निवास और उनकी सेवा की याचना करता है। ब्रज रस में माना जाता है कि यदि श्री राधा जी की कृपा मिल जाए, तो साक्षात भगवान श्री कृष्ण स्वतः ही सुलभ हो जाते हैं।55111
- लक्ष्मीनारायण नागला#राधे कृष्णा10351
- Omprakash Patel#राधे कृष्णा9489