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Nupur Arora - Author on ShareChat
Nupur Arora
1K views • 15 days ago
#bachpan #🧒मेरा बचपन #📜 Whatsapp स्टेटस
எகரஎfள்al எனஙஔச, कितने खुश मिज़ाज हुआ करते थे हम। எகரஎfள்al எனஙஔச, कितने खुश मिज़ाज हुआ करते थे हम।
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  • Manish Kumar - Author on ShareChat
    Manish Kumar
    Follow me. #बचपन की यादे #ऐसा होता है बचपन ❤ #बचपन की मस्ती #यादें बचपन की #बचपन
    Follow me., बचपन की यादे
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  •  - Author on ShareChat
     🅂🄾🄽🄰 🄲🅄🅃🄴 🄶🄸🅁🄻 
    #bachpan #bachpan ki yaadein
    bachpan, bachpan ki yaadein
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  • ᴮˡᵃᶜᵏᴇʀ - Author on ShareChat
    👑ᴮˡᵃᶜᵏ❥𝐋𝐨𝐯ᴇʀ🖤
    #bachpan ki yaadein #bachpan
    बारिश आज भी होती है, लेकिन अब कागज़ की नावों के संाथ दौड़ने वाला बचपन कहीं पीछे छूट गया है। 53 #parm sahu बारिश आज भी होती है, लेकिन अब कागज़ की नावों के संाथ दौड़ने वाला बचपन कहीं पीछे छूट गया है। 53 #parm sahu
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  • devinekanika - Author on ShareChat
    devinekanika
    ज़िंदगी में थोड़ा बचपना ज़रूरी है 😊❤️ #mere bachpana#bachpana #BACCHON KA BACHPANA #Enjoy
    ज़िंदगी में थोड़ा बचपना ज़रूरी है, mere bachpana
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    12
  •  - Author on ShareChat
    𝙲𝚑𝚊𝚞𝚛𝚊𝚜𝚒𝚢𝚊
    #bachpan #🧒मेरा बचपन
    bachpan, मेरा बचपन
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  •  - Author on ShareChat
    𝙲𝚑𝚊𝚞𝚛𝚊𝚜𝚒𝚢𝚊
    #bachpan #🧒मेरा बचपन
    bachpan, मेरा बचपन
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  • Inder Singh - Author on ShareChat
    Inder Singh
    #bachpan
    bachpan
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  • Atul Patil - Author on ShareChat
    Atul Patil 1586
    #Good morning Good morning #बचपन #बचपन की यादे #ऐसा होता है बचपन ❤ #👬दोस्ती-यारी
    Good morning







Good morning, बचपन
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  • mohit - Author on ShareChat
    mohit
    #bachpan #बचपन की यादे
    स्मृतियाँ ^ लुक्का छिपी आँख मिचौली नित्य हमारा काम था भागम भाग और लिंगड़ी छू से मिलता हमको आराम था सूरज की तपती किरणों से स्नान हमारा होता था धरती की पावन माटी से श्रृंगार हमारा होता था माँ की लोरी की मधुर ध्वनि हमको सबसे प्यारी लगती थी पूरे घर को सबसे प्यारी मेरी किलकारी लगती थी झूठ बोलते बहुत थे फिर भी होता सब कुछ सच्चा था हमको वो भोला बचपन लगता बहुत अच्छा था १ हैं वे मधुर दिवस अब हमको बहुत सताते हैं सच कहते मन प्रसन्न हो जाता है जब बीते दिन याद आते हैं। মীকিল কভিয়া - स्मृतियाँ ^ लुक्का छिपी आँख मिचौली नित्य हमारा काम था भागम भाग और लिंगड़ी छू से मिलता हमको आराम था सूरज की तपती किरणों से स्नान हमारा होता था धरती की पावन माटी से श्रृंगार हमारा होता था माँ की लोरी की मधुर ध्वनि हमको सबसे प्यारी लगती थी पूरे घर को सबसे प्यारी मेरी किलकारी लगती थी झूठ बोलते बहुत थे फिर भी होता सब कुछ सच्चा था हमको वो भोला बचपन लगता बहुत अच्छा था १ हैं वे मधुर दिवस अब हमको बहुत सताते हैं सच कहते मन प्रसन्न हो जाता है जब बीते दिन याद आते हैं। মীকিল কভিয়া -
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