यह दोहा श्रीकृष्ण की उस अद्भुत बाललीला का वर्णन करता है जब माता यशोदा ने बालक कृष्ण को मिट्टी खाने के आरोप पर अपना मुख खोलने को कहा। बालकृष्ण ने हठपूर्वक अपना मुख खोल दिया। जैसे ही माता यशोदा ने उनके मुख के भीतर देखा, वे आश्चर्यचकित रह गईं।
उन्हें कृष्ण के छोटे से मुख में सम्पूर्ण चराचर जगत का दर्शन हुआ। आकाश, पृथ्वी, पर्वत, नदियाँ, समुद्र, सूर्य, चन्द्रमा, ग्रह-नक्षत्र, देवता, जीव-जंतु तथा सम्पूर्ण सृष्टि उसी मुख में समाई हुई दिखाई दी। यह दृश्य बताता है कि जो बालक सामान्य मानव रूप में माता की गोद में खेल रहा था, वही वास्तव में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का अधिष्ठाता परमेश्वर है।
दोहा भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य महिमा और उनकी असीम ईश्वरता का सुंदर चित्रण करता है। साथ ही यह भी दर्शाता है कि ईश्वर अपनी योगमाया से भक्तों के बीच साधारण रूप में रहते हुए भी अनन्त और सर्वव्यापक बने रहते हैं। माता यशोदा को प्राप्त यह विश्वरूप-दर्शन भक्ति साहित्य की सबसे अद्भुत घटनाओं में से एक माना जाता है। #❤️Love You ज़िंदगी ❤️



