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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - न पोत्रै न पुत्रै IIन सत्त्रै न मित्रैIl नःतातै न मातै।न जातै न पातैIl अर्थः हे भाई! जब परमात्मा का कोई शत्रु या मित्र नहीं है, तो इसका अर्थ है कि वह किसी के प्रति पक्षपाती नहीं है। इसी तरह, जब इंसान अपनी 'तृष्णा' पर विजय पा लेता है, तो वह भी के द्वंद्व से ऊपर उठकर साक्षी शत्रु मित्र भाव में आ जाता है। परमात्मा का कोई परिवार नहीं है, फिर भी वह पूर्ण है। यह इस बात का प्रतीक है कि पूर्णता बाहर के रिश्तों में नहीं, बल्कि अपने भीतर के 'सत्य' में होती है। दुनियावी पहचान आत्मा के स्तर पर कोई मायने नहीं रखती। बाणी की यह पंक्तियाँ इंसान को उस परमनशांति की ओर ले जाती हैं जहाँ वह बाहरी दुनिया के शोर और रिश्तों की जटिलताओं से मुक्त होकर अपने शुद्ध स्वरूप को देख सके। न पोत्रै न पुत्रै IIन सत्त्रै न मित्रैIl नःतातै न मातै।न जातै न पातैIl अर्थः हे भाई! जब परमात्मा का कोई शत्रु या मित्र नहीं है, तो इसका अर्थ है कि वह किसी के प्रति पक्षपाती नहीं है। इसी तरह, जब इंसान अपनी 'तृष्णा' पर विजय पा लेता है, तो वह भी के द्वंद्व से ऊपर उठकर साक्षी शत्रु मित्र भाव में आ जाता है। परमात्मा का कोई परिवार नहीं है, फिर भी वह पूर्ण है। यह इस बात का प्रतीक है कि पूर्णता बाहर के रिश्तों में नहीं, बल्कि अपने भीतर के 'सत्य' में होती है। दुनियावी पहचान आत्मा के स्तर पर कोई मायने नहीं रखती। बाणी की यह पंक्तियाँ इंसान को उस परमनशांति की ओर ले जाती हैं जहाँ वह बाहरी दुनिया के शोर और रिश्तों की जटिलताओं से मुक्त होकर अपने शुद्ध स्वरूप को देख सके। - ShareChat