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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - 66 वहम था की सारा बाग़ अपना है.. तूफान के बाद पता चला कि सूखे पत्तों पर भी हवाओं का हक है | गुलजार 66 वहम था की सारा बाग़ अपना है.. तूफान के बाद पता चला कि सूखे पत्तों पर भी हवाओं का हक है | गुलजार - ShareChat