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दोहा कबीर दास #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - दोहा जिलानी मैं जलौं , जलती जलहर जाऊँ। मो देख्याँ जलहर जलै , संतौ कहा बुझाऊँ।I भावार्थः विरहिणी कहती है कि विरह में जलती हुई मैं सरोवर (या ডল-সান) के पास गई। वहाँ मैंने देखा कि मेरे विरह की आग से जलाशय भी जल रहा है। हे संतो! बताइए मैं अपनी विरह की आग को कहाँ बुझाऊँ? (संत कबीर दास) Motivational Videos App Want ' दोहा जिलानी मैं जलौं , जलती जलहर जाऊँ। मो देख्याँ जलहर जलै , संतौ कहा बुझाऊँ।I भावार्थः विरहिणी कहती है कि विरह में जलती हुई मैं सरोवर (या ডল-সান) के पास गई। वहाँ मैंने देखा कि मेरे विरह की आग से जलाशय भी जल रहा है। हे संतो! बताइए मैं अपनी विरह की आग को कहाँ बुझाऊँ? (संत कबीर दास) Motivational Videos App Want ' - ShareChat