#Lakshmi 🌺✨ क्या आप जानते हैं?
जिस स्तोत्र के प्रभाव से देवराज इंद्र को पुनः स्वर्ग का वैभव, धन, ऐश्वर्य और यश प्राप्त हुआ… वही अद्भुत एवं चमत्कारी ॥
💰🌸 ॥ श्री इंद्र कृत लक्ष्मी स्तोत्रम् ॥ 🌸💰
✨ दरिद्रता नाशक • ऐश्वर्य प्रदायक • सौभाग्य वर्धक दिव्य स्तोत्र ✨
श्री इंद्र कृत लक्ष्मी स्तोत्रम् ॥ आज भी साधकों के जीवन से दरिद्रता, आर्थिक संकट और दुर्भाग्य को दूर करने वाला माना जाता है! ✨🌺
🌲🔱 शास्त्रोक्त परिचय 🔱🌲
जब देवराज इंद्र अपने पाप एवं अहंकार के कारण समस्त ऐश्वर्य, वैभव और स्वर्ग की समृद्धि खो बैठे, तब उन्होंने परम श्रद्धा से जगन्माता महालक्ष्मी की स्तुति की। उस दिव्य स्तुति से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी ने उन्हें पुनः धन, वैभव, यश एवं सुख प्रदान किया। वही दिव्य स्तोत्र आज “॥ इंद्र कृत श्री लक्ष्मी स्तोत्रम् ॥” के नाम से प्रसिद्ध है।
🌲🌺 माँ महालक्ष्मी का दिव्य स्वरूप 🌺🌲
"या सा पद्मासनस्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी।
गम्भीरावर्तनाभिः स्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया॥"
"लक्ष्मीं क्षीरसमुद्रराजतनयां श्रीरंगधामेश्वरीम्।
दासीभूतसमस्तदेववनितां लोकैकदीपाङ्कुराम्॥"
"नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥"
"सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके देवि नारायणि नमोऽस्तुते॥"
🌲🌼 ध्यानम् 🌼🌲
श्वेतवस्त्रपरिधानां सुवर्णाभां मनोहराम्।
कमलासनसंस्थां तां ध्यायेल्लक्ष्मीं हरिप्रियम्॥
🔸 हस्ते पद्मं वरं चैव अभयं च दधानिकाम्।
मुक्ताहारविभूषाढ्यां सर्वाभीष्टफलप्रदाम्॥
🔸 प्रसन्नवदनां देवीं सर्वलोकैकपूजिताम्।
सर्वसम्पत्प्रदां नित्यं भक्तानुग्रहकारिणीम्॥
🔸 ध्यायेद्देवीं महालक्ष्मीं विष्णुवक्षःस्थलस्थिताम्।
सर्वसौभाग्यजननीं सर्वमङ्गलकारिणीम्॥
🌲🕉️ स्तोत्र संकल्पः 🕉️🌲
“मम सकलदारिद्र्यदुःखनिवारणपूर्वकं धन-धान्य-समृद्धि-ऐश्वर्य-यश-कीर्तिपुत्रपौत्रादि सकलाभीष्टसिद्ध्यर्थं श्रीमहालक्ष्मीप्रीत्यर्थं इन्द्रकृतश्रीलक्ष्मीस्तोत्रपाठं करिष्ये॥”
🌲🔱 विनियोगः 🔱🌲
अस्य श्रीइन्द्रकृतश्रीलक्ष्मीस्तोत्रमन्त्रस्य देवराज इन्द्र ऋषिः।
अनुष्टुप् छन्दःश्रीमहालक्ष्मीर्देवता श्रीं बीजम्
ह्रीं शक्तिः क्लीं कीलकम्
मम सकलसमृद्धिप्राप्त्यर्थे जपे विनियोगः॥
🌲🌺 करन्यासः एवं अङ्गन्यासः 🌺🌲
ॐ श्रीं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः।
ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः।
ॐ क्लीं मध्यमाभ्यां नमः।
ॐ ऐं अनामिकाभ्यां नमः।
ॐ सौः कनिष्ठिकाभ्यां नमः।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः॥
हृदयाय नमः।
शिरसे स्वाहा।
शिखायै वषट्।
कवचाय हुम्।
नेत्रत्रयाय वौषट्।
अस्त्राय फट्॥
🌲📜🌸 ॥ श्री इंद्र कृत श्री लक्ष्मी स्तोत्रम् ॥ 🌸📜🌲
नमस्ते सर्वलोकानां जननीमब्जसंभवाम्।
श्रियमुन्निद्रपद्माक्षीं विष्णुवक्षःस्थलस्थिताम्॥
पद्मालयां पद्मकरां पद्मपत्रनिभेक्षणाम्।
वन्दे पद्ममुखीं देवीं पद्मनाभप्रियामहम्॥
त्वं सिद्धिस्त्वं स्वधा स्वाहा सुधा त्वं लोकपावनी।
संध्या रात्रिः प्रभा भूतिर्मेधा श्रद्धा सरस्वती॥
यज्ञविद्या महाविद्या गुह्यविद्या च शोभने।
आत्मविद्या च देवि त्वं विमुक्तिफलदायिनी॥
आन्वीक्षिकी त्रयी वार्ता दण्डनीतिस्त्वमेव च।
सौम्या सौम्यैर्जगत्पूज्या त्वयैतद्देवि पूरितम्॥
का त्वन्या त्वामृते देवि सर्वयज्ञमयं वपुः।
अध्यास्ते देवदेवस्य योगिचिन्त्यं गदाभृतः॥
त्वया देवि परित्यक्तं सकलं भुवनत्रयम्।
विनष्टप्रायमभवत् त्वयेदानीं समेधितम्॥
दाराः पुत्रास्तथा गेहं सुहृद्दान्यधनादिकम्।
भवत्येतन्महाभागे नित्यं त्वद्वीक्षणान्नृणाम्॥
शरीरारोग्यमैश्वर्यमरिपक्षक्षयो सुखम्।
देवि त्वद्दृष्टिदृष्टानां पुरुषाणां न दुर्लभम्॥
🌲🌼 संपूर्ण साधना विधि 🌼🌲
🕯️ उत्तम समय एवं मुहूर्त
✔ शुक्रवार
✔ दीपावली की रात्रि
✔ शरद पूर्णिमा
✔ अक्षय तृतीया
✔ प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त या संध्या काल
🌲🧘 आसन एवं दिशा
✔ कमलगट्टा अथवा लाल ऊन का आसन
✔ उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें
🌲🌺 आवश्यक पूजन सामग्री
🔸 कमलगट्टे की माला
🔸 शुद्ध घी का दीपक
🔸 कमल पुष्प
🔸 गुलाब एवं लाल पुष्प
🔸 शंख, धूप, कपूर
🔸 खीर, मिश्री, पंचमेवा नैवेद्य
🔸 लाल अथवा गुलाबी वस्त्र
🌲🪔 पूजा विधि क्रमबद्ध रूप में
✨ स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
✨ पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें।
✨ माता लक्ष्मी एवं भगवान विष्णु का चित्र स्थापित करें।
✨ घी का दीपक एवं धूप प्रज्वलित करें।
✨ गणेश वंदना एवं गुरु स्मरण करें।
✨ संकल्प लेकर ध्यान मंत्र का जप करें।
✨ न्यास एवं विनियोग करें।
✨ श्रद्धा भाव से स्तोत्र का पाठ करें।
✨ अंत में लक्ष्मी आरती एवं क्षमा प्रार्थना करें।
✨ प्रसाद वितरित करें।
🌲🥛 आहार-विहार एवं परिहार ✨🌲
✔ सात्त्विक भोजन करें
✔ असत्य, क्रोध एवं अपवित्रता से दूर रहें
✔ नशा, मांसाहार एवं तामसिक भोजन त्यागें
✔ स्तोत्र पाठ के समय मन को शांत रखें
✔ साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन श्रेष्ठ माना गया है
🌲⚠️ विशेष सावधानियाँ ⚠️🌲
❌ पाठ करते समय अपशब्द एवं नकारात्मक विचार न रखें
❌ साधना स्थान अपवित्र न होने दें
❌ दीपक को बीच में बुझने न दें
❌ बिना श्रद्धा एवं विश्वास के पाठ न करें
✨🌺 साधक के ऊपर होने वाले दिव्य प्रभाव 🌺✨
🌻 मुखमंडल में तेज एवं आकर्षण बढ़ता है
🌻 मानसिक अशांति समाप्त होने लगती है
🌻 घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है
🌻 व्यापार एवं नौकरी में उन्नति मिलने लगती है
🌻 शत्रु बाधाएँ शांत होने लगती हैं
🌻 धन आगमन के नए मार्ग खुलते हैं
🌻 पारिवारिक कलह में कमी आती है
🌻 आत्मविश्वास एवं निर्णय शक्ति बढ़ती है
🌻 सौभाग्य एवं मान-सम्मान में वृद्धि होती है
🌻 माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है
🌲💰🌸 इस स्तोत्र के चमत्कारी लाभ 🌸💰🌲
✔ दरिद्रता एवं आर्थिक संकट से मुक्ति
✔ रुका हुआ धन वापस आने की संभावना
✔ व्यापार में लाभ एवं वृद्धि
✔ नौकरी में सफलता एवं पदोन्नति
✔ विवाह एवं पारिवारिक सुख में वृद्धि
✔ ग्रहदोष एवं नकारात्मकता में कमी
✔ मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक बल
✔ रोग एवं भय से रक्षा
✔ यश, वैभव एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति
✔ स्थायी सुख-समृद्धि एवं सौभाग्य की प्राप्ति
🌲🌺🔱 विशेष संदेश 🔱🌺🌲
यदि आपके जीवन में शत्रु बाधा, ग्रह बाधा, आर्थिक संकट, विवाह बाधा, संतान बाधा, व्यापार हानि, पारिवारिक अशांति अथवा अन्य किसी भी प्रकार की समस्या चल रही हो… तथा आप अपनी जन्मकुंडली का गहन ज्योतिषीय विश्लेषण, शास्त्रोक्त उपाय, धार्मिक अनुष्ठान, पूजन, साधना अथवा व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त करना चाहते हों, तो श्रद्धापूर्वक हमसे संपर्क करें।
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✨ कमेंट में “जय माँ लक्ष्मी” अवश्य लिखें और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करें। ✨


