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#मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕
मेरे विचार - अथ त्रयोदशोउध्यायः श्रीभगवानुवाच इदं   शरीरं क्षेत्रमित्यभिधीयते | 317 वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः I। एतद्यो श्रोभगवान् बोले= हे अर्जुन! यह शरौर ' क्षेत्र ११  इस नामसे कहा जाता है और इसको जो जानता इस   नामसे उनके तत्त्वको उसको है क्षेत्रज्ञ  আনননাল স্ানীতন ক্ষঙ্কন ফঁII ? Il क्षेत्रज्ञं चापि मां विद्धि सर्वक्षेत्रेषु भारत क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोर्ज्ञानं  यत्तज्ज्ञानं সন ٦ ١١ हे अर्जुन ! तू सब क्षेत्रोंमें क्षेत्रज्ञ अर्थात् जीवात्मा  भी मुझे ही जान२ और क्षेत्र-क्षेत्रज्ञको अर्थातू विकारसहित प्रकृतिका और पुरुपका जो तत्त्वसे जानना है* वह ज्ञान है॰ ऐसा मेरा मत है Il २ II १० जैसे खेतमैं बौये हुए बोजोंका उनके अनुरूप फल समयपर हौता है, वैसे हो इसमें बोये हुए कर्मोके संस्काररूप बीजोंका Tee फल समयपर प्रकट होता है, इसलिये इसका नाम ' क्षेत्र ' ऐसा कहा है। २. गौता अघ्याय १५ श्लोक ७ और उसको टिप्पणो   देखनो चाहिये। गौता अध्याय १३ श्लोक २३ और उमको टिप्पणो देखनो चाहिये | श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १३ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार अथ त्रयोदशोउध्यायः श्रीभगवानुवाच इदं   शरीरं क्षेत्रमित्यभिधीयते | 317 वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः I। एतद्यो श्रोभगवान् बोले= हे अर्जुन! यह शरौर ' क्षेत्र ११  इस नामसे कहा जाता है और इसको जो जानता इस   नामसे उनके तत्त्वको उसको है क्षेत्रज्ञ  আনননাল স্ানীতন ক্ষঙ্কন ফঁII ? Il क्षेत्रज्ञं चापि मां विद्धि सर्वक्षेत्रेषु भारत क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोर्ज्ञानं  यत्तज्ज्ञानं সন ٦ ١١ हे अर्जुन ! तू सब क्षेत्रोंमें क्षेत्रज्ञ अर्थात् जीवात्मा  भी मुझे ही जान२ और क्षेत्र-क्षेत्रज्ञको अर्थातू विकारसहित प्रकृतिका और पुरुपका जो तत्त्वसे जानना है* वह ज्ञान है॰ ऐसा मेरा मत है Il २ II १० जैसे खेतमैं बौये हुए बोजोंका उनके अनुरूप फल समयपर हौता है, वैसे हो इसमें बोये हुए कर्मोके संस्काररूप बीजोंका Tee फल समयपर प्रकट होता है, इसलिये इसका नाम ' क्षेत्र ' ऐसा कहा है। २. गौता अघ्याय १५ श्लोक ७ और उसको टिप्पणो   देखनो चाहिये। गौता अध्याय १३ श्लोक २३ और उमको टिप्पणो देखनो चाहिये | श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १३ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat