#श्री हरि
प्रथम पंक्ति: "नाम हरि का लेत ही, मिटते मन के क्लेश।"
इस पंक्ति का अर्थ है कि जैसे ही कोई मनुष्य सच्चे मन से भगवान (हरि) के नाम का स्मरण करता है या उनका नाम लेता है, वैसे ही उसके मन के सारे दुःख, कष्ट, चिंताएं और मानसिक क्लेश पूरी तरह से समाप्त हो जाते हैं। प्रभु का नाम मन को शांति और असीम आनंद देने वाला है।
द्वितीय पंक्ति: "ज्यों तम हर ले भोर की, प्रथम किरण विशेष॥"
यहाँ कवि ने एक बहुत ही सुंदर उदाहरण (दृष्टांत) दिया है। कवि कहते हैं कि ठीक उसी प्रकार, जैसे 'भोर' यानी सुबह की जो 'प्रथम किरण विशेष' (पहली किरण) होती है, वह आते ही रात के घने 'तम' (अंधेरे) को एक पल में हर लेती है (मिटा देती है)।
मुख्य भाव
जैसे सुबह का सूरज निकलते ही अंधकार का अस्तित्व खत्म हो जाता है, वैसे ही जीवन में चाहे कितना भी बड़ा मानसिक तनाव, अज्ञान या दुःख रूपी अंधकार क्यों न हो, 'हरि' नाम का प्रकाश फैलते ही वह सारा अंधकार तुरंत दूर हो जाता है। यह दोहा ईश्वर के नाम की महिमा और उसकी शक्ति को दर्शाता है।आचार्य हनी शास्त्री


