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#जय श्री कृष्ण महाभारत काल में अर्जुन वनवास के दौरान कई तीर्थों की यात्रा कर रहे थे। इसी समय वे द्वारका पहुँचे, जहाँ उनकी भेंट भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा से हुई। सुभद्रा अत्यंत सुंदर, गुणवान और साहसी थीं। अर्जुन उन्हें देखते ही मन ही मन प्रेम करने लगे। दूसरी ओर सुभद्रा भी अर्जुन के तेज और वीरता से प्रभावित हो गईं।🚩 उस समय बलराम चाहते थे कि सुभद्रा का विवाह दुर्योधन से हो। दुर्योधन उनका प्रिय शिष्य था, इसलिए वे उसे योग्य वर मानते थे। लेकिन भगवान कृष्ण जानते थे कि दुर्योधन अधर्म के मार्ग पर चल रहा है। वे यह भी जानते थे कि अर्जुन और सुभद्रा का मिलन भविष्य में धर्म की स्थापना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।🚩 भगवान कृष्ण ने अर्जुन की भावनाओं को समझ लिया। उन्होंने अर्जुन को सलाह दी कि वे क्षत्रिय परंपरा के अनुसार सुभद्रा का हरण कर लें। उस समय कई क्षत्रिय विवाह “हरण विवाह” परंपरा के अनुसार भी होते थे, जहाँ वीर योद्धा अपनी प्रिय को रथ में बैठाकर ले जाते थे। कृष्ण ने गुप्त रूप से अर्जुन की सहायता की और सही समय बताया। एक दिन जब सुभद्रा मंदिर से लौट रही थीं, तब अर्जुन उन्हें रथ में बैठाकर ले गए।🚩 जब यह समाचार द्वारका पहुँचा, तो बलराम अत्यंत क्रोधित हो गए। वे अर्जुन के विरुद्ध युद्ध करने को तैयार हो गए। लेकिन भगवान कृष्ण ने उन्हें शांत किया और समझाया कि अर्जुन महान योद्धा, धर्मात्मा और योग्य वर हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि सुभद्रा भी अर्जुन से प्रेम करती हैं। यह सुनकर बलराम का क्रोध शांत हो गया और उन्होंने इस विवाह को स्वीकार कर लिया। आगे चलकर अर्जुन और सुभद्रा के पुत्र अभिमन्यु का जन्म हुआ, जिसने महाभारत युद्ध में महान वीरता दिखाई।🚩 🌟 कथा का सार — भगवान सदैव धर्म का साथ देते हैं, सच्चा प्रेम अंततः सफल होता है और कृष्ण की हर लीला के पीछे भविष्य की बड़ी योजना छिपी होती है। 🙏 जय श्रीकृष्ण🙏 🙏 हरि बोल🙏
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