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##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - सच्चे मित्र का चुनाव  मित्र तथा उत्तम पड़ोसी का चुनाव बड़ा कठिन है। अनेक  व्यक्ति आपसे अपना निकालने के स्वार्थमय उद्देश्य से IH मित्रता करने को उतावले रहते हैं, किंतु अपना कार्य निकल  जाने पर कोई सहायता नहीं करते। अतः बड़ी सावधानी से व्यक्ति का चरित्र, आदतें संग॰ शिक्षा इत्यादि का निश्चय करके मित्र का चुनाव होना चाहिए। आपका मित्र उदार, बुद्धिमान् और सत्यपरायण होना चाहिए। विश्वासपात्र मित्र जीवन पुरुषार्थी की एक औषधि है। हमें अपने मित्रों से यह आशा करनी चाहिए ೫ ೯್ಠ್ ' कि॰वे हमारे उत्तम संकल्पों करेंगे, दोषों एवं त्रुटियों से बचाएँगे तथा हमारी सत्यता, पवित्रता और मर्यादा को पुष्ट करेंगे । ೫೯ ೯7 पर पाँव रखेंगे, तब हमें सचेत करेंगे। सच्चा कुमार्ग मित्र एक पथप्रदर्शक, विश्वास-पात्र और सच्ची सहानुभूति से पूर्ण होना चाहिए। यह कर्त्तव्य उसी से पूर्ण होगा, जो दृढ़- चित्त और सत्य- संकल्प का हो। हमें ऐसे ही मित्रों का पल्ला पकड़ना चाहिए जिनमें आत्मबल हो, जैसे सुग्रीव ने राम का पल्ला पकड़ा 1 मित्र हों तो प्रतिष्ठित और शुद्ध हृदय के हों॰ मृदुल पुरुषार्थी हों॰ शिष्ट और सत्यनिष्ठ हों॰ जिससे हम अपने उनके भरोसे पर छोड़ सकें और यह विश्वास कर सकें किसी प्रकार का धोखा न होगा। मित्रता एक नई হাকি की योजना है। ज्योति जनवरी १९५१ पृष्ठ २१  సUకా सच्चे मित्र का चुनाव  मित्र तथा उत्तम पड़ोसी का चुनाव बड़ा कठिन है। अनेक  व्यक्ति आपसे अपना निकालने के स्वार्थमय उद्देश्य से IH मित्रता करने को उतावले रहते हैं, किंतु अपना कार्य निकल  जाने पर कोई सहायता नहीं करते। अतः बड़ी सावधानी से व्यक्ति का चरित्र, आदतें संग॰ शिक्षा इत्यादि का निश्चय करके मित्र का चुनाव होना चाहिए। आपका मित्र उदार, बुद्धिमान् और सत्यपरायण होना चाहिए। विश्वासपात्र मित्र जीवन पुरुषार्थी की एक औषधि है। हमें अपने मित्रों से यह आशा करनी चाहिए ೫ ೯್ಠ್ ' कि॰वे हमारे उत्तम संकल्पों करेंगे, दोषों एवं त्रुटियों से बचाएँगे तथा हमारी सत्यता, पवित्रता और मर्यादा को पुष्ट करेंगे । ೫೯ ೯7 पर पाँव रखेंगे, तब हमें सचेत करेंगे। सच्चा कुमार्ग मित्र एक पथप्रदर्शक, विश्वास-पात्र और सच्ची सहानुभूति से पूर्ण होना चाहिए। यह कर्त्तव्य उसी से पूर्ण होगा, जो दृढ़- चित्त और सत्य- संकल्प का हो। हमें ऐसे ही मित्रों का पल्ला पकड़ना चाहिए जिनमें आत्मबल हो, जैसे सुग्रीव ने राम का पल्ला पकड़ा 1 मित्र हों तो प्रतिष्ठित और शुद्ध हृदय के हों॰ मृदुल पुरुषार्थी हों॰ शिष्ट और सत्यनिष्ठ हों॰ जिससे हम अपने उनके भरोसे पर छोड़ सकें और यह विश्वास कर सकें किसी प्रकार का धोखा न होगा। मित्रता एक नई হাকি की योजना है। ज्योति जनवरी १९५१ पृष्ठ २१  సUకా - ShareChat