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#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - MENE ALTAAZ ज़िंदा जिस्म कि यहाँ कोई अहमियत नहीं 'ग़ालिब" मज़ार बन जाने दो मेले लगा करेंगे...! mirza ghalib MENE ALTAAZ ज़िंदा जिस्म कि यहाँ कोई अहमियत नहीं 'ग़ालिब" मज़ार बन जाने दो मेले लगा करेंगे...! mirza ghalib - ShareChat