Manjeet Singh Thakral
#NEET से शुरू हुआ आंदोलन, लेकिन संरचनात्मक शिक्षा-सुधार कहां है?
#CJP का आंदोलन NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा संबंधी अनियमितताओं, विद्यार्थियों की परेशानी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही की मांग से उभरा।आंदोलनकारियों ने परीक्षा-व्यवस्था में सुधार, प्रभावित परिवारों के लिए सहायता और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसी मांगें रखी हैं। इनमें से कई मांगें उचित और गंभीर हैं।
पेपर लीक कोई मामूली प्रशासनिक चूक नहीं है। यह लाखों विद्यार्थियों की मेहनत, अभिभावकों की बचत और परीक्षा-प्रणाली की विश्वसनीयता पर हमला है। यदि पेपर लीक हुआ है, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यदि जांच में प्रशासनिक या राजनीतिक विफलता सामने आती है, तो मंत्री से जवाब मांगा जाना चाहिए।
लेकिन क्या केवल धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भारतीय शिक्षा-व्यवस्था की बीमारी का इलाज है?
एक मंत्री जाएगा, दूसरा आ जाएगा।
क्या उसके बाद पेपर लीक रुक जाएंगे?
क्या निजी कोचिंग उद्योग का दबाव समाप्त हो जाएगा?
क्या परीक्षा-केंद्रित शिक्षा की क्रूरता बदल जाएगी?
क्या प्रश्नपत्र तैयार करने, छापने, पहुंचाने और डिजिटल सुरक्षा की पारदर्शी व्यवस्था बनेगी?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर समयबद्ध कार्रवाई का कानून बनेगा?
क्या छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य सहायता, शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा?
आन्दोलनकारियों को अपनी मांगों में इन मांगो को भी शामिल करना चाहिए ताकि शिक्षा संबंधी समस्यायों का वास्तविक और हमेशा का समाधान मिल सके।
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