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#🙋‍♂️السلام علیکم💐 #📝اسلام کا پیغام 🕌 #محرم #🙌نیک اصلاح #👨🏻‍🏫لوگوں کے لئے سیکھ🧑‍🤝‍🧑
🙋‍♂️السلام علیکم💐 - ताज़ियादारी Paigham-e-Rasool ৬; N 2 Scஎlசசஎd8 का महीना आते ही कई जगह ताज़िए बनाए जाते हैं , मुहर्रम  जुलूस निकाले जाते हैं और उन्हें अकीदत का हिस्सा समझा जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ताज़ियादारी का सबूत कुरआन और सुन्न्नत में मौजूद हैं? नबी #फ ने मुहर्रम की फ़ज़ीलत बयान की, आशूरा के रोज़े की तरगीब दी, लेकिन न तो कभी ताज़िया और न ही बनाने का हुक्म दिया। बनाया रज़ियल्लाहु अन्हुम, अहल-ए-बैत और सहाबा सलफ़ ए-सालिहीन में से किसी से भी ताज़ियादारी साबित नहीं हैं। हज़रत हुसैन रज़ी अल्लाहू अन्हू के बेटे हज़रत ज़ैनुलआब्दीन करबला के बाद ३३ साल दुनिया में रहें लेकिन कभी ताज़ियादारी नहीं की। Rasoon =0-` दीन वही है जो अल्लाह के रसूल और उनके सहाबा से साबित हों। ज़िसने हमारे इस दीन में कोई ऐसी नबी # नई बात निकाली जो उसमें से नहीं है, ने फ़रमायाः तो वह रद्द है! Sahih al-Bukhari, Sahih Muslim इसलिए मुसलमान को चाहिए कि मुहर्रम के महीने #347` पर अमल करे , आशूरा का रोज़ा रखे, और हर उस काम से बचे जिसका सबूत कुरआन और सुन्नत में न हो। दीन में कामयाबी सुन्नत को अपनाने में है, नई रस्मों  को अपनाने में नहीं। नईन्नई रस्मों पर अमल करने से आखिरत में नुक़सान उठाना पड़ेगा| कुरआन व सुन्नत को समझिए, और उसी पर अमल कीजिए! ताज़ियादारी Paigham-e-Rasool ৬; N 2 Scஎlசசஎd8 का महीना आते ही कई जगह ताज़िए बनाए जाते हैं , मुहर्रम  जुलूस निकाले जाते हैं और उन्हें अकीदत का हिस्सा समझा जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ताज़ियादारी का सबूत कुरआन और सुन्न्नत में मौजूद हैं? नबी #फ ने मुहर्रम की फ़ज़ीलत बयान की, आशूरा के रोज़े की तरगीब दी, लेकिन न तो कभी ताज़िया और न ही बनाने का हुक्म दिया। बनाया रज़ियल्लाहु अन्हुम, अहल-ए-बैत और सहाबा सलफ़ ए-सालिहीन में से किसी से भी ताज़ियादारी साबित नहीं हैं। हज़रत हुसैन रज़ी अल्लाहू अन्हू के बेटे हज़रत ज़ैनुलआब्दीन करबला के बाद ३३ साल दुनिया में रहें लेकिन कभी ताज़ियादारी नहीं की। Rasoon =0-` दीन वही है जो अल्लाह के रसूल और उनके सहाबा से साबित हों। ज़िसने हमारे इस दीन में कोई ऐसी नबी # नई बात निकाली जो उसमें से नहीं है, ने फ़रमायाः तो वह रद्द है! Sahih al-Bukhari, Sahih Muslim इसलिए मुसलमान को चाहिए कि मुहर्रम के महीने #347` पर अमल करे , आशूरा का रोज़ा रखे, और हर उस काम से बचे जिसका सबूत कुरआन और सुन्नत में न हो। दीन में कामयाबी सुन्नत को अपनाने में है, नई रस्मों  को अपनाने में नहीं। नईन्नई रस्मों पर अमल करने से आखिरत में नुक़सान उठाना पड़ेगा| कुरआन व सुन्नत को समझिए, और उसी पर अमल कीजिए! - ShareChat