दीपक आर्य
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #💐💐 मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐 #happyfriendshipday🙈🙉🙊 #सावन #🌷श्रावण मास की शुभकामनाएं 🌷 ।।ओ३म्।।
🙏सादर नमस्ते जी।
∆∆ *विद्या (अर्थात् वेदविद्या) के बिना परमेश्वर का ज्ञान कभी नहीं होता और विद्या पढ़ कर भी जो परमेश्वर को नहीं जानता और न उसकी आज्ञा में चलता है उसका मनुष्यशरीर धारण करना निष्फल चला जाता है।*
*टिप्पणी:-* चारों वेद ईश्वर का ही प्रतिपादन (वर्णन) करते हैं। बिना वेदों को पढ़ें हम ईश्वर के यथार्थस्वरूप को नहीं जान सकते।
∆∆ *जो मनुष्य इस संसार में शरीर का आश्रय कर अधर्म करते हैं वे दृढ़ बंधन को प्राप्त होते हैं और जो शास्त्रों को पढ़, योगाभ्यास कर धर्म करते हैं वे ही मुक्ति को प्राप्त होते हैं।
*टिप्पणी:-* जीते जी भी जीवन में अनेक दृढ़ बंधनों को प्राप्त होते हैं। शरीर मन परिवार समाज का बंधन उन्हें अच्छे कार्य करने से रोकता है जो वे अच्छा कार्य करना चाहते हैं उसमें अनेक बाधाएं उपस्थित हो जाती है अवरोध उत्पन्न हो जाते हैं विरोध उत्पन्न हो जाते हैं जिसके कारण वे अपने कार्य को नहीं कर पाते। इसके विपरीत जो धर्म कार्य करते हैं वे शरीर मन परिवार समाज आदि के बंधनों को नहीं प्राप्त होते जो जो उत्तम कार्य करना चाहते हैं वे शीघ्रता से सरलता से सिद्ध हो जाते हैं अर्थात वे जीते जी ही मुक्त होते हैं। और मरने के बाद मुक्तिपद को प्राप्त करते हैं।
••••महर्षि दयानंद
प्रस्तुति:- ध्रुवदेव, दर्शनयोग महाविद्यालय, आर्यवन, रोजड
।।ओ३म्।।
🙏 सादर नमस्ते जी।
*उदुत्तमं वरुण०।।(यजु० १२-१२)*
*भावार्थः-जैसे ईश्वर के गुण कर्म और स्वभाव के अनुकूल सत्य आचरणों में वर्तमान हुए धर्मात्मा मनुष्य पाप के बन्धनों से छूट के सुखी होते हैं वैसे ही उत्तम राजा को प्राप्त हो के प्रजा के पुरुष आनन्दित होते हैं ॥ १२ ॥*
*हंसः शुचिषद्वसुर्०।।(यजु० १२-१४)*
*भावार्थः-जो पुरुष ईश्वर के समान प्रजाओं को पालने और सुख देने में समर्थ हो वही राजा होने के योग्य होता है । और ऐसे राजा के विना प्रजाओं को सुख भी नहीं हो सकता ।।१४।।*
(महर्षिदयानंदकृत यजुर्वेद भाष्य)
प्रस्तुति:- ध्रुवदेव, दर्शनयोग महाविद्यालय, आर्यवन, रोजड